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'पाकिस्तान 1984 में ही परमाणु परीक्षण में सक्षम था'

इस्लामाबाद, 28 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक अब्दुल कदीर खान ने कहा है कि पाकिस्तान के पास 1984 में परमाणु परीक्षण करने की क्षमता थी और उसने योजना भी बनाई थी। लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक ने इस विचार का विरोध किया, क्योंकि इससे पाकिस्तान को मिल रहे उस अंतर्राष्ट्रीय सहायता में कटौती हो जाती, जो उसे अफगानिस्तान पर सोवियत संघ के कब्जे की वजह से मिल रहा थी।

'डॉन' ने खान के हवाले से कहा है, "हम लोग सक्षम थे और हमने वर्ष 1984 में परमाणु परीक्षण करने की योजना बनाई थी, लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल जिया ने इसका विरोध कर दिया।"

उन्होंने कहा, "जनरल जिया का विचार था कि यदि पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किया तो दुनिया पाकिस्तान की सैन्य सहायता रोक देगी।" खान ने यह भी कहा कि पाकिस्तान पांच मिनट में काहुता से नई दिल्ली को निशाना बनाने में समर्थ था।" काहुता पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का एक शहर है।

खान ने यह भी कहा, "मेरी सेवा के बगैर पाकिस्तान कभी भी परमाणु शक्ति संपन्न पहला मुस्लिम राष्ट्र नहीं बन पाता। हम लोग बहुत कठिन परिस्थतियों में यह क्षमता हासिल करने में समर्थ थे, लेकिन हमने यह किया।" खान पाकिस्तान के परमाणु संपन्न देश बनने के अवसर यौम-ए-तकबीर पर एक सभा को संबोधित कर रहे थे।

मुशर्रफ के कार्यकाल में अपने साथ हुए व्यवहार के संदर्भ में उन्होंने कहा, "परमाणु वैज्ञानिकों को देश में वह सम्मान नहीं दिया जाता, जिसके वे हकदार हैं।"

खान ने कहा, "हम लोगों ने अपने देश के परमाणु कार्यक्रम को जो सेवा दी, उसके बदले सबसे खराब दौर का सामना कर रहे हैं।"

वर्ष 2004 में हुए एक बड़े परमाणु प्रसार स्कैंडल के केंद्र में कदीर ही थे।

श्रृंखलाबद्ध नाटकीय घटनाक्रमों में तत्कालीन सेना प्रमुख एवं राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने खान को परमाणु प्रसार का एक खतरनाक नेटवर्क संचालित करने का आरोपी बताया था। मुशर्रफ की इस घोषणा के कुछ ही दिनों बाद खान का रिकॉर्ड किया हुआ एक बयान प्रसारित हुआ था, जिसमें उन्होंने परमाणु प्रसार की जितनी भी जानकारियां मिली थी उसकी पूरी जिम्मेदारी अकेले ली थी।

--आईएएनएस

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  • पंजाब चुनाव के कुछ ही माह पहले गठित हुई स्वराज पार्टी

    चंडीगढ़/नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। पंजाब विधानसभा चुनाव के कुछ ही माह रह गए हैं, इस बीच रविवार को स्वराज पार्टी नाम से एक नई पार्टी शुरू करने की घोषणा की गई। पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मंजीत सिंह ने चंडीगढ़ में इसकी घोषणा की।

    इस नई पार्टी ने खुद को स्वराज अभियान से जुड़े होने की घोषणा की है। स्वराज अभियान आम आदमी पार्टी (आप) से निष्कासित नेता योगेंद्र यादव की अध्यक्षता वाला एक सामाजिक-राजनीतिक गुट है।

    सर्वसम्मति से स्वराज पार्टी के अध्यक्ष चुने गए मनजीत सिंह ने कहा, "पूरे पंजाब से 'स्वराज लहर' के बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने स्वराज पार्टी की शुरुआत की है। प्रखंड से ग्राम स्तर तक पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिए 41 सदस्यीय राज्य कार्य समिति का गठन किया गया है।"

    'स्वराज लहर' स्वराज अभियान की पंजाब इकाई है।

    पार्टी नेतृत्व ने कहा कि पंजाब के 22 जिलों में से 11 में पार्टी का संगठनात्मक ढांचा काम भी करने लगा है।

    हालांकि, इस सम्मेलन में जहां नई पार्टी के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया उसमें स्वराज अभियान के योगेंद्र यादव एवं प्रशांत भूषण सहित कोई भी राष्ट्रीय नेता मौजूद नहीं था।

    स्वराज पार्टी की घोषणा के कुछ घंटों के अंदर ही 'स्वराज अभियान' ने एक बयान जारी कर खुद को इस पार्टी से अलग कर लिया।

    --आईएएनएस
  • ्न'ईरान के नागरिकों के लिए इस साल नामुमकिन लग रही हज यात्रा'
    तेहरान, 29 मई (आईएएनएस)। ईरान के लोगों के लिए इस साल हज यात्रा पर जाना नामुमकिन लग रहा है। ईरान के मंत्री ने रविवार को यह बात कही।

    ईरान के संस्कृति एवं इस्लामी मार्गदर्शन मंत्री अली जन्नाती ने कहा, "यह माना गया था कि हमें अपने द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सऊदी अरब के अधिकारियों के जवाब के लिए रविवार तक इंतजार करना होगा।"

    समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने जन्नाती के हवाले से कहा है, "ईरान के प्रतिनिधियों के साथ सऊदी पक्ष के शब्दाडंबर और उनके व्यवधान से पता चलता है कि ईरान के लोगों के लिए इस साल हज कर पाना असंभव है।"

    उन्होंने कहा, "ईरान का हज और तीर्थस्थल संगठन इस पर सोमवार को एक बयान जारी करेगा।"

    सऊदी अधिकारियों के साथ हाल में हुई कई दौर की बातचीत के बाद भी ईरान, सऊदी अरब के साथ सितंबर में होने वाली वार्षिक हज यात्रा में शामिल होने को लेकर किसी सहमति पर पहुंचने में नाकाम रहा है।

    पिछले हफ्ते ईरान के विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब पर इस साल ईरान के लोगों की हज यात्रा में अड़ंगा लगाने का आरोप लगाया था।

    सऊदी अरब ने कहा है कि ईरान हज का राजनीतिकरण कर रहा है। उसने कहा है कि ईरान खुद ही अपने लोगों की हज यात्रा की राह में रोड़े लगा रहा है।

    ईरान और सऊदी अरब के बीच अभी सीरिया और यमन के मुद्दे को लेकर विवाद चल रहा है। साथ ही सुन्नी बहुल सऊदी अरब ने जनवरी में प्रमुख शिया धर्मगुरु निम्र अल-निम्र को 46 अन्य के साथ फांसी दे दी थी। इसके विरोध में बड़ी संख्या में ईरानी सड़कों पर उतर आए थे। कुछ ने तेहरान और मशहद में सऊदी राजनयिक मिशनों में तोड़फोड़ की थी।

    इसके बाद सऊदी अरब ने ईरान से इन हमलों को लेकर अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिए थे। खाड़ी के अधिकांश सुन्नी देशों के शिया बहुल ईरान के साथ रिश्ते ठीक नहीं हैं।

    --आईएएनएस
  • जीएसटी के लिए क्षेत्रीय पार्टियों का साथ लेगी भाजपा : शाह

    हैदराबाद, 29 मई (आईएएनएस)। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को यहां कहा कि वस्तु एवं सेवा कर विधेयक सहित लंबित विधेयकों को पारित कराने में समर्थन देने के लिए सभी क्षेत्रीय पार्टियों से उनकी पार्टी बात करेगी।

    शाह से जब यह पूछा गया कि क्या वह तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) से समर्थन मांगेंगे, क्योंकि राज्यसभा में उसके सदस्यों की संख्या बढ़ने जा रही है, तो उन्होंने मीडिया से कहा, "हम लंबित विधेयकों को पारित कराने में मदद के लिए राजनीति से ऊपर उठकर सभी राजनीतिक दलों से संपर्क करेंगे।"

    शाह राजग सरकार के दो वर्षो की उपलब्धियां गिनाने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह से यहां पहुंचे। उन्होंने शमशाबाद हवाईअड्डे के पास स्थित एक होटल में मीडिया को संबोधित किया।

    राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में टीआरएस के शामिल होने की कयासबाजियों पर शाह ने कहा, "टीआरएस की ओर से इस तरह का कोई आवेदन नहीं है।"

    उन्होंने कहा, "केंद्र संघवाद की भावना के अनुसार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में क्रमश: तेलुगू देशम पार्टी और टीआरएस की सरकारों के साथ लगातार अच्छे संबंध बनाए रखेगी।"

    यह पूछे जाने पर कि आंध्र प्रदेश में भाजपा नेतृत्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से खुश नहीं है, शाह ने कहा, "जिन्हें शिकायत हो, उकना नाम तो मुझे बताइए।"

    कश्मीर में सैनिक कॉलोनी बनाने को लेकर भाजपा की रुचि के बारे में शाह ने कहा, "महबूबा मुफ्ती हमारी गठबंधन सहयोगी हैं और उन्होंने भी कहा है कि पंडितों को वापस लाया जाएगा। इस मुद्दे पर हमारी एक राय है।" जबकि महबूबा ने कहा है कि कश्मीरी पंडितों को फिर से बसाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है।

    सरकार के दो वर्ष पूरे होने के जश्न की कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा की गई आलोचना पर शाह ने कहा, "यह कोई जश्न नहीं है। हम जनता को बता रहे हैं कि पिछले दो वर्षो में हमने क्या किया। भाजपा की यह परंपरा है कि प्रत्येक वर्ष जनता को प्रगति रपट दी जाए।"

    शाह ने बाद में नरेंद्र मोदी सरकार की पिछले दो वर्षो की उपलब्धियों पर ब्लॉक स्तर के भाजपा कार्यकर्ताओं की एक बैठक को संबोधित किया।

    --आईएएनएस
  • मणिपुर के मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा
    इंफाल, 29 मई (आईएएनएस)। मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने रविवार को भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर पूर्वोत्तर राज्यों में अस्थिरता पैदा करने के लिए निशाना साधा।

    सिंह ने दो जून को प्रस्तावित नगर निगम चुनाव से पूर्व इंफाल पश्चिम जिले के क्वोकीथल मोइरंग पुरेल में एक चुनावी रैली में कहा, "भाजपा जब भी केंद्र में सत्ता में आती है, मणिपुर में हमेशा अस्थिरता पैदा करती है।"

    सिंह ने यद्यपि अपने आरोपों को स्पष्ट नहीं किया, लेकिन उनका इशारा 18 जून, 2001 को हुई हिंसा के संदर्भ में था, जिसमें 18 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे। यह घटना तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-इसाक-मुइवा के साथ संघर्ष विराम बढ़ाने के बाद हुई थी।

    पिछले वर्ष से मणिपुर में इनर लाइन परमिट (आईएलपी) प्रणाली की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में एक विद्यार्थी की मौत हो गई है और 500 से अधिक लोग घायल हो गए हैं।

    दूसरी तरफ आईएलपी की मांग के खिलाफ आयोजित रैलियों के दौरान चूड़ाचांदपुर जिले में नौ लोगों की मौत हो गई। लगभग एक महीने तक प्रवासी विरोधी तीन विधेयकों को लागू करने की मांग को लेकर राज्य में विरोध प्रदर्शन हुआ है। ये तीनों विधेयक पिछले वर्ष 31 अगस्त को विधानसभा में पारित किए गए थे।

    नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला करते हुए इबोबी सिंह ने कहा, "संप्रग सरकार ने पूर्वोन्मुखी नीति पेश की थी। राजग ने इसे बदल कर एक्ट ईस्ट पॉलिसी कर दिया। लोगों को पिछले दो वर्षो में कोई बदलाव नहीं दिखाई दिया।"

    उन्होंने कहा, "मणिपुर में जितनी भी परियोजनाएं शुरू हुईं, सब संप्रग सरकार के दौरान। अब मणिपुर के तुपुल तक रेल संपर्क है और इस काम को मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते पूरा किया गया था।"

    इंफाल नगर निगम चुनाव के लिए आयोजित अब तक की इस पहली चुनावी सभा के लिए सुरक्षा के भारी इंतजाम किए गए थे। क्योंकि आंदोलनरत कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि राजनीतिक पार्टियां यहां चुनावी प्रचार करने के बदले नई दिल्ली जाएं और आईएलपी के मुद्दे पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात करें।

    --आईएएनएस
  • हरियाणा में 5 जून से फिर जाट आरक्षण आन्दोलन
    नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति (एबीजेएएसएस) ने रविवार को सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लिए पांच जून से हरियाणा में फिर से आन्दोलन शुरू करने की घोषणा की।

    एबीजेएएसएस के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने यहां संवाददाताओं से कहा, "हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने अपना वादा पूरा नहीं किया है, इसलिए हम पांच जून से हरियाणा में जाट न्याय रैली का आयोजन करेंगे।"

    हालांकि उन्होंने आन्दोलन के बारे में विस्तृत ब्योरा नहीं दिया।

    सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण की मांग के समर्थन में पिछले फरवरी महीने में जाटों ने आन्दोलन किया था।

    आन्दोलन के दौरान हुई हिंसा में 30 लोगों की मौत हुई थी और 320 लोग घायल हुए थे। इसके अतिरिक्त करोड़ों रुपये मूल्य की संपंत्ति नष्ट हुई थी।

    रैली के आयोजन का ताजा निर्णय एबीजेएएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में किया गया था। बैठक में आन्दोलन की नई पारी की तैयारी के बारे में भी चर्चा हुई थी।

    मलिक ने कहा, "हमलोगों से वादा किया गया था कि जाट आरक्षण आन्दोलन के दौरान जो लोग पहले गिरफ्तार किए गए थे, उन्हें रिहा किया जाएगा और मारे गए लोगों के परिजनों या घायलों को मुआवजा दिया जाएगा। हमलोग शांतिपूर्ण ढग से रैली निकालेंगे, लेकिन पुलिस अगर जवाबी कार्रवाई करेगी या हिंसक तरीके से हमलोगों को रोकने की कोशिश करेगी तो आन्दोलनकारी अपना निर्णय करने के लिए स्वतंत्र हैं।"

    जाटों और अन्य पांच जातियों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण देने के लिए हरियाणा सरकार ने गत 13 मई को हरियाणा पिछड़ा वर्ग (नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण) अधिनियम, 2016 को अधिसूचित किया था।

    लेकिन पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत आरक्षण पर अंतरिम स्थगन आदेश दे दिया।

    इसके बाद जाट समुदाय के लोगों ने आगामी पांच जून से फिर से आन्दोलन शुरू करने की धमकी दी। धमकी के आलोक में हरियाणा पुलिस ने गत 27 मई को कहा था कि वह किसी भी आन्दोलन से निपटने को तैयार है।

    --आईएएनएस
  • सहारा सदस्यों से न मिल पाना दुर्भाग्यपूर्ण : सुब्रत राय
    भुवनेश्वर, 29 मई (आईएएनएस)। सहारा इंडिया के प्रमुख सुब्रत रॉय ने रविवार को कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कटक में बैठक स्थल पर अधिकारियों द्वारा धारा 144 लगाने और स्थान को खाली कराने के कारण वह सहारा इंडिया परिवार के सदस्यों से नहीं मिल पाए।

    बैठक स्थल पर रॉय के पहुंचने से पहले ही संकट की संभावना को देखते हुए पुलिस ने धारा 144 लगा दिया था। रॉय कटक में इंडोर स्टेडियम में सहारा इंडिया के कर्मचारियों और निवेशकों को संबोधित करने वाले थे।

    रॉय ने एक बयान में कहा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि मैं कटक में करीब तीन हजार सदस्यों से नहीं मिल सका। हमें अनुमति थी, लेकिन आखिरी समय में धारा 144 लगा दिया गया।"

    उन्होंने बताया कि उन्हें पुलिस से पता चला कि किसी फोरम ने बैठक के दौरान प्रदर्शन करने और व्यवधान पैदा करने की धमकी दी थी।

    रॉय ने कहा, "पुलिस प्रशासन ने वाजिब फैसला लिया, वरना 3,000 सदस्य अपना मानसिक संतुलन खो बैठते, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो जाती। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें शांति बनाए रखने में पुलिस प्रशासन के साथ सहयोग करना चाहिए।"

    रॉय ने कहा, "मैं फोरम सदस्यों से अनुरोध करूंगा कि वे सच्चाई को ध्यान में रखें कि सच की झूठ से तुलना नहीं की जा सकती। यह ध्यान रखना जरूरी है कि सहारा की फाइनेंशियल सेवा कंपनी कभी भी चिट फंड कंपनी नहीं रही है।"

    उन्होंने सभी जरूरी सहायता करने के लिए भुवनेश्वर पुलिस की भी सराहना की।

    पुलिस ने रविवार को धारा 144 लगाकर इंडोर स्टेडियम खाली करा लिया था।

    मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सर्वोच्च न्यायालय से पैरोल पर छूटे रॉय ने शनिवार को हैदराबाद से आभार यात्रा शुरू की है।

    उनकी यात्रा का मकसद सहारा समूह के कर्मचारियों और निवेशकों को कठिन घड़ी में साथ देने के लिए धन्यवाद देना है।

    निवेशकों का पैसा वापस नहीं करने पर रॉय को मार्च 2014 में तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वह छह मई, 2016 को पैरोल पर छूटे हैं।

    --आईएएनएस

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