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सीबीएसई के 12वीं के परिणाम घोषित, लड़कियां फिर आगे

नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के कक्षा 12वीं के नतीजे शनिवार को घोषित कर दिए गए और एक बार फिर लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया है। दिल्ली की सुकृति गुप्ता और हरियाणा की पलक गोयल ने परीक्षा में पहला और दूसरा स्थान प्राप्त कर इस बार फिर लड़कियों का परचम लहराया है।

बेहतर प्रदर्शन करते हुए 78.85 प्रतिशत लड़कों की तुलना में 88.58 प्रतिशत लड़कियां पास हुई हैं।

वर्ष 2015 में लड़कों का पास प्रतिशत 81.59 था, जबकि 90.87 प्रतिशत लड़कियां पास हुई थीं।

सीबीएसई के अनुसार, इस वर्ष 83.05 प्रतिशत विद्यार्थियों ने परीक्षा पास की है, जबकि पिछले साल 82 प्रतिशत विद्यार्थियों ने परीक्षा पास की थी।

केरल के तिरुवनंतपुरम में सर्वाधिक 97.61 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए हैं और उसके बाद तमिलनाडु के चेन्नई में 92.63 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए हैं।

इस वर्ष करीब 10,65,000 विद्यार्थी 12वीं की परीक्षा में बैठे थे। परीक्षाएं एक मार्च से शुरू होकर 22 अप्रैल को समाप्त हुई थीं।

दिल्ली के मोंटफोर्ट स्कूल की सुकृति गुप्ता ने परीक्षा में सर्वाधिक अंक हासिल किए हैं। उन्हें 99.4 प्रतिशत अंक हासिल हुए हैं।

विज्ञान की छात्रा सुकृति को भौतिकी और रसायन शास्त्र में पूरे अंक हासिल हुए हैं, जबकि अंग्रेजी, गणित और कंप्यूटर विज्ञान में प्रत्येक में उन्हें 100 में से 99 अंक मिले हैं। कुल मिलाकर उन्हें 500 में से 497 अंक प्राप्त हुए हैं।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र के टैगोर पब्लिक स्कूल की पलक गोयल अखिल भारतीय रैंकिंग में दूसरे स्थान पर रहीं। उन्हें सुकृति से केवल एक अंक कम मिला है। उन्होंने कुल 500 में 496 यानी 99.2 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।

हरियाणा में करनाल के सेंट थेरेसा कान्वेंट स्कूल की सौम्या उप्पल और चेन्नई के के.के. नगर के पी.एस.बी.बी. सीनियर सेंकेंडरी स्कूल के अजीश सीकर दोनों को तीसरा स्थान मिला है। दोनों ने 99 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।

विकलांग वर्ग के विद्यार्थियों में हरियाणा के फरीदाबाद के डीएवी पब्लिक स्कूल की मुदिता जगोता ने 97 प्रतिशत अंकों के साथ पहला स्थान प्राप्त किया है, जबकि यहां आर.के. पुरम के केंद्रीय विद्यालय के सिद्धार्थ विश्वास ने दूसरा स्थान और उत्तर प्रदेश के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल के रक्षित मलिक ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।

पिछले साल की तुलना में इस वर्ष शिक्षा बोर्ड में पंजीकरण करने वाले विद्यार्थियों की संख्या में 2.38 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

--आईएएनएस

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  • पोप फ्रांसिस युवा यूट्यूबर्स से मिले, माराडोना पर लगाया ठहाका
    रोम, 30 मई (आईएएनएस)। पोप फ्रांसिस ने छह महाद्वीपों के युवा यूट्यूबर्स के एक समूह से मुलाकात की और उन्हें अपने वीडियो के जरिये दुनिया को बेहतर जगह बनाने को प्रेरित किया। इस दौरान उन्होंने महान फुटबॉल खिलाड़ी डिएगो माराडोना से संबंधित एक सवाल पर ठहाका भी लगाया।

    समाचार एजेंसी 'एफे' की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को रोम में पोप फ्रांसिस के शैक्षणिक संस्थान स्कॉलस ऑकरेंट्ेस के सिक्थ वर्ल्ड कांग्रेस के समापन पर पोप ने वीडियो शेयरिग प्लेटफॉर्म के दो सितारों संग लोगों से बातचीत की। सिक्थ वर्ल्ड कांग्रेस में 190 देशों के युवा लोगों ने भाग लिया।

    यूट्यूब के उन सभी सितारों को बैठक में आमंत्रित किया गया था, जिनके हजारों व लाखों फॉलोअर्स हैं।

    पोप फ्रांसिस ने इन युवा यूट्यूब स्टार से अकेले में मुलाकात की। यह मुलाकात भावनाओं से ओतप्रोत थी, लेकिन इसमें गुदगुदाने वाले पल भी आए।

    पोप ने फुटबॉल के बारे में भी बात की। इस दौरान एक यूट्यूब सितारे ने उनसे पूछा कि 1986 के फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान दिग्गज खिलाड़ी डिएगो माराडोना के चर्चित गोल 'हैंड ऑफ गॉड' में वास्तव में दैवीय शक्ति का हाथ था? इस पर पोप फ्रांसिस ने ठहाका लगाया, हालांकि उन्होंने सवाल का जवाब नहीं दिया।

    पोप फ्रांसिस के साथ एक निजी मुलाकात के बाद युवा यूट्यूब स्टार स्कॉलस ऑकरेंटेस वर्ल्ड एजुकेशन कांफ्रेंस के समापन समारोह में शरीक हुए। इस समापन समारोह में हॉलीवुड अभिनेत्री सलमा हयाक, अभिनेता रिचर्ड गेरे व जॉर्ज क्लूनी भी शरीक हुए।

    पोप फ्रांसिस ने युवाओं व शिक्षा द्वारा दुनिया में बदलाव लाने की मंशा से 2013 में स्कॉलस ऑकरेंटेस नामक संस्थान की स्थापना की थी।

    --आईएएनएस
  • मंत्रालय ने आईआईएम-अहमदाबाद अध्यक्ष पद के लिए सूची खारिज की
    अहमदाबाद, 29 मई (आईएएनएस)। मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम)-अहमदाबाद के प्रबंधन द्वारा संस्थान के अध्यक्ष पद के लिए भेजी गई नामों की एक सूची खारिज कर दी और उम्मीदवारों की एक नई सूची मांगी है। यह जानकारी रविवार को सूत्रों से मिली।

    खारिज की गई सूची में शामिल नामों में इंफोसिस के बोर्ड अध्यक्ष आर. सेशासई, एचडीएफसी अध्यक्ष दीपक पारेख और हीरो मोटोकॉर्प के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पवन मुंजाल भी शामिल हैं।

    मंत्रालय को यह सूची एक तीन सदस्यीय खोज समिति ने भेजी थी। लार्सन एंड टुब्रो के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक और आईआईएम-ए के पूर्व अध्यक्ष अनिल नाइक इस समिति के अध्यक्ष थे।

    आईआईएम-ए ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इंकार किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक ये नाम इसलिए खारिज किए गए हैं, क्योंकि मार्च में सूची तैयार करने के लिए हुई बैठक में कोई भी सरकारी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था।

    संस्थान के 15 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर में केंद्र सरकार के दो प्रतिनिधि और राज्य सरकार के एक प्रतिनिधि हैं, लेकिन बैठक में इन तीनों में से एक भी नहीं थे।

    संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर के अध्यक्ष पद से नाइक ने कार्यकाल समाप्त होने के दो साल पहले 31 दिसंबर 2015 को इस्तीफा दे दिया है, लेकिन तब से यह पद रिक्त पड़ा हुआ है।

    कैडिला हेल्थकेयर के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पंकज पटेल अभी संस्थान के अंतरिम अध्यक्ष हैं।

    --आईएएनएस
  • सिंगापुर में चीनी समाचार पत्रों की प्रदर्शनी
    सिंगापुर, 29 मई (आईएएनएस/सिन्हुआ)। सिंगापुर की सांस्कृतिक, समुदाय और युवा मामलों की मंत्री ग्रेस फू ने शनिवार को सनयात सेन नानयांग मेमोरियल हॉल में पुराने चीनी समाचार पत्रों पर एक विशेष प्रदर्शनी का शुभारंभ किया।

    प्रदर्शनी का शीर्षक 'अर्ली चाइनीज न्यूजपेपर्स इन सिंगापुर (1881-1942)' है, जिसमें सिंगापुर में प्रकाशित होने वाले चीनी समाचार पत्रों का इतिहास, विकास प्रस्तुत किया गया है।

    इस प्रदर्शनी में 100 से अधिक कलाकृतियां, ऐतिहासिक दस्तावेज और तस्वीरें शामिल हैं।

    यह प्रदर्शनी आगंतुकों को चीनी समाचार-पत्रों के माध्यम से सिंगापुर के 1880 के दशक से 1942 में जापान के आक्रमण के इतिहास के बारे में बताती है। इससे लोगों को उस समय के पत्रकारिता के रूझानों आदि की भी जानकारी मिलती है।

    फू ने कहा कि सिंगापुर में प्रारंभिक चीनी समाचार पत्रों ने इस क्षेत्र में रहने वाले चीनी समुदाय को जानकारी देने, शिक्षित करने और प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन समाचार पत्रों ने सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम किया।

    प्रदर्शनी के निरीक्षकों के अनुसार यह प्रदर्शनी नौ अक्टूबर तक जारी रहेगी। इस दौरान सिंगापुर में कई प्रमुख चीनी समाचार-पत्रों के समृद्ध इतिहास पर प्रकाश डालने वाली सार्वजनिक वार्ता श्रृंखला का भी आयोजन किया जाएगा।

    --आईएएनएस
  • स्पेलिंग बी प्रतियोगिता में भारतवंशियों ने फिर लहराया परचम
    वाशिंगटन, 28 मई (आईएएनएस)। भारतीय मूल के दो छात्रों ने अमेरिका की स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी प्रतियोगिता जीत ली है। लगातार यह तीसरा साल है जब भारतीय मूल के बच्चों को यह जीत हासिल हुई है।

    सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, टेक्सास के आस्टिन निवासी निहार जंग (11) और न्यूयॉर्क राज्य के कॉर्निग के जयराम हथवार (13) को गुरुवार की रात नेशनल स्पेलिंग बी का संयुक्त विजेता घोषित किया गया।

    जयराम ने अपनी जीत की खुशी का इजहार कुछ इन शब्दों में किया, "यह बिल्कुल पागल कर देने वाला है। मैं इसे किन शब्दों में बयां करूं यह भी नहीं जानता।"

    निहार ने कहा, "मैं नि:शब्द हूं। मैं कुछ कह नहीं सकता। मैं तो अभी सिर्फ पांचवी कक्षा में हूं।"

    निहार ने 'गेसेल्सचाफ्ट' शब्द का बिल्कुल सही उच्चारण किया जिसे एक तरह के सामाजिक रिश्ते के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है। जयराम ने 'फेल्डनेक्रेइस' शब्द का शुद्ध उच्चारण किया।

    जयराम के भाई श्रीराम ने वर्ष 2014 की उच्चारण प्रतियोगिता जीती थी।

    अमेरिका टुडे की खबर के अनुसार, दो बार ऐसा लगा कि जयराम प्रतियोगिता से बाहर हो जाएगा। उसने कुत्ते की एक नस्ल 'ड्राथार' और एक भाषा जिसका नाम 'मिसचस्प्राचे' का उच्चारण सही नहीं किया था लेकिन निहार भी दो शब्दों को सही नहीं बोल पाया जिससे जयराम प्रतियोगिता में बना रहा।

    इन उच्चारणकर्ताओं को करीब 27 लाख रुपये (40 हजार डॉलर) नकद एवं अन्य पुरस्कार मिलेंगे।

    टेलीविजन चैनल पर सीधा प्रस्तारित इस प्रतियोगिता में राष्ट्रीय विजेता बनने के लिए अंतिम दौर के लिए 10 प्रतिभागी चयनित हुए थे।

    इसकी शुरुआत 284 प्रतिभागियों से हुई थी जिसमें 143 लड़के एवं 141 लड़कियां थीं लेकिन लिखित परीक्षा और स्टेज पर दो दौर के उच्चारण जांच के बाद बुधवर की शाम तक यह संख्या 45 रह गई थी।

    गुरुवार दोपहर बाद यह संख्या कम होकर अंतिम दौर के लिए कैलिफोर्निया, कोलोराडो, फ्लोरिडा, इंडियाना, मैसाच्यूसेट्स, न्यूयॉर्क और टेक्सास से आए कुल 10 प्रतिभागी बच गए।

    पिछले साल के विजेता ओलाथ के वान्या शिवशंकर एवं मिसूरी के गोकुल वेंकटाचलम थे।

    --आईएएनएस
  • सीबीएसई 10वीं का परिणाम घोषित, लड़कियों ने मारी बाजी
    नई दिल्ली, 28 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं कक्षा का परिणाम शनिवार को घोषित कर दिया गया, जिसमें एक बार फिर लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया है। सीबीएसई ने सभी 10 क्षेत्रों के परिणामों की घोषणा की है।

    अन्य क्षेत्रों की तुलना में तिरुवनंतपुरम में रिकॉर्ड 99.87 फीसदी विद्यार्थियों ने सफलता पाई है।

    सीबीएसई के मुताबिक, परीक्षा में 14,91,293 विद्यार्थी शामिल हुए थे। परीक्षा एक मार्च से शुरू होकर 28 मार्च तक चली थी।

    पिछले साल की तुलना में इस साल 8.5 फीसदी अधिक विद्यार्थियों का पंजीकरण हुआ था।

    सीबीएसई के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस साल 96.21 फीसदी विद्यार्थियों ने सफलता अर्जित की है। बोर्ड के मुताबिक, कुल 97.32 फीसदी विद्यार्थी परीक्षा में पास हुए हैं।

    --आईएएनएस
  • मणिपुर : 73 सरकारी स्कूलों में 10वीं के सभी विद्यार्थी फेल

    इम्फाल, 28 मई (आईएएनएस)। मणिपुर के 323 सरकारी स्कूलों में से 73 स्कूलों में 10वीं की परीक्षा के विद्यार्थियों की सफलता का प्रतिशत शून्य पाया गया है। इस परीक्षा के परिणाम मंगलवार को जारी किए गए थे।

    यही नहीं, इन 73 स्कूलों का एक भी विद्यार्थी (जो कुल विद्यार्थियों का 22.6 फीसदी है) मणिपुर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (एचएसएलसी) में पास नहीं हो पाया, जिसकी परीक्षा एक मार्च से 19 मार्च तक ली गई थी।

    मणिपुर के 323 सरकारी स्कूलों के कुल 6,484 विद्यार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया था, जिनमें से केवल 2,781 विद्यार्थी ही सफल हो पाए, जो 42.8 फीसदी हैं।

    एचएसएलसी 2016 में राज्य के सफल विद्यार्थियों का प्रतिशत 61.52 फीसदी है। यही नहीं, कुल 28 सरकारी स्कूलों में केवल एक-एक विद्यार्थी ही इस परीक्षा में सफल हो पाया है। यहां तक कि शीर्ष के 20 सफल विद्यार्थियों में से सरकारी स्कूल का एक भी विद्यार्थी नहीं है।

    इसका सीधा अर्थ यह है कि करदाताओं के लाखों रुपये खर्च कर चलाए जा रहे सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन निजी स्कूलों के मुकाबले कमतर रहा है।

    एक उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा, "सरकार ने सरकारी स्कूलों के खराब प्रदर्शन को काफी गंभीरता से लिया है। इसका एक ही समाधान है कि इन सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया जाए, ताकि विद्यार्थी निजी स्कूलों में पढ़ने जाएं।"

    आधिकारिक रपट के मुताबिक, साल दर साल स्थिति खराब होती जा रही है। जहां 2013 में 28 सरकारी स्कूल ऐसे थे, जिनका एक भी विद्यार्थी एचएसएलसी परीक्षा में सफल नहीं हो पाया। वहीं, 2014 में ऐसे स्कूलों की संख्या बढ़कर 48 हो गई और 2015 में 70 हो गई।

    इस परीक्षा परिणाम से विद्यार्थी और अभिभावक दोनों निराश हैं।

    रोमेन चिंगथम ने अपने बेटे को सरकारी स्कूल में भेजा था। उन्होंने आईएएनएस से कहा कि वे इस परीक्षा में अपने बेटे के फेल होने से निराश हैं।

    उन्होंने कहा, "मैंने अपने बेटे को इसलिए सरकारी स्कूल में भेजा कि मंहगे निजी स्कूल में पढ़ाने की मेरी हैसियत नहीं है।"

    सरकारी अधिकारियों ने सरकारी स्कूलों के निराशाजनक प्रदर्शन पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। सरकार इस समस्या का समाधान सरकारी स्कूलों को बंद करने में देख रही है।

    उदाहरण के लिए इम्फाल शहर के बीच स्थित टोमबिसाना हाईस्कूल को बंद कर दिया गया है और अब वहां एक बाजार का निर्माण कार्य चल रहा है।

    बंगाली हाईस्कूल की इमारत को भी तोड़ दिया गया और वहां अब रामकृष्ण मिशन स्कूल बनाया जा रहा है।

    अमीर लोग तो अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में बहुत पहले से पढ़ाना छोड़ चुके हैं। वहां अब केवल गरीब परिवारों के बच्चे ही पढ़ने के लिए जाते हैं।

    --आईएएनएस

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