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बिहार चुनाव : अंतिम चरण की बढ़त तय करेगी सत्ता किसकी Featured

मनोज पाठक

बिहार विधानसभा चुनाव के पांचवें व अंतिम चरण में राज्य के नौ जिलों के 57 विधानसभा सीटों के लिए गुरुवार को वोट डाले जाएंगे। इस चरण में न केवल अन्य चरणों की तुलना में सबसे अधिक सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पिछले चुनाव के परिणाम को दोहराना भी चुनौती है। माना जा रहा है कि इस चरण में जिस गठबंधन को बढ़त मिलेगी, राज्य में अगली सरकार बनाने में उसकी राह आसान होगी।

इस चरण में सत्ताधारी महागठबंधन की ओर से जनता दल (युनाइटेड) ने 25, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने 20 और कांग्रेस ने 12 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 38, लोकजनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने 11, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) ने पांच और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) ने तीन प्रत्याशी चुनावी समर में उतारे हैं।

राजनीति के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार गिरीन्द्र नाथ झा कहते हैं कि इस चुनाव में वोटों का बिखराव तय है। उदाहरण देते हुए वह कहते हैं, मल्लाह जाति का मतदाता अगर मिथिलांचल में महागठबंधन की ओर है तो सीमांचल में मल्लाह मतदाता राजग की ओर दिख रहा है। उनका मानना है कि मुस्लिम और यादव मतदाताओं में भी राजग सेंध लगाने की कोशिश में है।

झा के अनुसार, "मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) कुछ क्षेत्रों में दोनों गठबंधनों को प्रभावित करते नजर आ रहा हैं, मगर ऐसा नहीं कि कोई भी पार्टी किसी खास जाति के मतदाता पर अपना दावा कर सके।"

झा का मानना है कि मुख्य मुकाबला दोनों गठबंधनों में ही है, लेकिन मधेपुरा समेत यादव बहुल क्षेत्रों में जन अधिकार पार्टी तो कटिहार में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) मुकाबले को त्रिकोणात्मक या बहुकोणीय बना रहा है।

पिछले विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र से सबसे अधिक 23 सीटें भाजपा के खाते में गई थी, जबकि उस चुनाव में भाजपा के सहयोगी जद (यू) ने 20 सीट पर विजय पताका फहराया था। इसके अलावा राजद को आठ, कांग्रेस को तीन, लोजपा को दो और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी। बाद में हालांकि लोजपा के दोनों विधायक जद (यू) में शामिल हो गए थे।

राजनीति के जानकार रामेश्वर प्रसाद की राय अलग है। उनका दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन क्षेत्रों में रैली के दौरान संबोधन काफी संयमित रहा है, जिसका प्रभाव मतदाताओं पर अवश्य दिख रहा है, मगर पिछले चुनाव में इसी क्षेत्र से राजद को सबसे अधिक सीटें मिली थीं। ऐसे में यह तय है कि राजद इस चुनाव में भी इस इलाके में बढ़त बना ले।

प्रसाद कहते हैं, "महागठबंधन के लिहाज से अंतिम चरण का चुनाव पहले से कहीं ज्यादा मुफीद माना जा रहा है, लेकिन सहरसा, सुपौल और मधेपुरा में जन अधिकार पार्टी उसके लिए चुनौती खड़ी कर रही है।" वे कहते हैं कि अंतिम चरण का परिणाम ही किसी राजनीतिक दल या गठबंधन को बिहार की सत्ता तक ले जाएगा।

इस चरण के 57 सीटों में से सांसद पप्पू यादव की पार्टी जन अधिकार पार्टी 46 सीटों पर प्रत्याशी उतारा है, जबकि एआईएमआईएम छह सीटों पर पहली बार बिहार के चुनावी समर में भाग्य आजमा रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने 12 क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी उतारे हैं।

पांचवें चरण के चुनाव में जिन नौ जिलों के 57 विधानसभा क्षेत्रों के लिए चुनाव होने जा रहा है, उनमें चार जिलों में महागठबंधन तथा दो जिलों में राजग का दबदबा माना जा रहा है। इस चरण में मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा व दरभंगा जिलों के विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होना है।

किशनगंज के सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल महताब कहते हैं कि बाहरी मुस्लिम तो चुनाव जीत कर चले जाएंगे, इसके बाद उन्हें कोई कहां खोजेगा? किशनगंज के लोग स्थानीय उम्म्ीदवार को ही वोट देंगे। उनका कहना है कि विकास के नाम पर ही मतदाता अपना जनप्रतिनिधि चुनेंगे।

उल्लेखनीय है कि इस चरण के मतदान के लिए जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई केंद्रीय मंत्री मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए चुनावी सभा कर चुके हैं। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी प्रचार के अंतिम दिन मंगलवार को चुनावी रैली की।

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  • मोदी की चुप्पी असहिष्णुता को उनका समर्थन : सोमनाथ

    कोलकाता, 7 नवंबर (आईएएनएस)। लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने देश में असहिष्णुता जारी विवाद पर मोदी की चुप्पी को लेकर शनिवार को जमकर निशाना साधा और कहा कि यह असहिष्णुता के प्रति मोदी के समर्थन को दर्शाता है।

    सोमनाथ ने यहां ललित कला अकादमी में एक सभा को संबोधित करते हुए ये बातें कही।

    सोमनाथ ने कहा, "हमारी सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन मामलों पर प्रधानमंत्री का चुप रहना उनके समर्थन को दर्शाता है। चुप्पी भी बोलती है। हमारे प्रधानमंत्री इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं..तो आगे की राह कौन दिखाएगा?"

    उन्होंने आगे कहा, "क्या आप इसकी कल्पना कर सकते हैं कि एक के बाद एक ऐसी घटनाएं घट रही हैं और हमारे प्रधानमंत्री दादरी कांड को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हैं और यह घटना एक विशेष राज्य में घटी है। यह किसी एक राज्य का मामला या शांति प्रक्रिया की बात नहीं है..यह मानवीयता की बात है।"

    नोबेल पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में 1919 में नाइटहुड की उपाधि लौटाए जाने का उदाहरण पेश करते हुए सोमनाथ ने लेखकों, इतिहासकारों, फिल्मकारों एवं बुद्धिजीवियों की आलोचना करने वाले केंद्र सरकार में मंत्रियों के एक हिस्से की तीखी आलोचना की।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

  • चीन, ताइवान के बीच सिंगापुर में ऐतिहासिक वार्ता

    सिंगापुर, 7 नवंबर (आईएएनएस/सिन्हुआ)। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनके ताइवान के समकक्ष मा यिंग जिउ के बीच हाथ मिलाने के साथ ही शनिवार को इन दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक शिखर वार्ता की शुरुआत हो गई। चीन व ताइवान के बीच बीते 66 वर्षो के दौरान यह पहली बैठक है।

    शी ने कहा, "आज का दिन इतिहास में याद किया जाएगा। बैठक ने चीन व ताइवान के संबंधों का एक ऐतिहासिक पन्ना खोल दिया है।"

    वार्ता शुरू होने से पहले दोनों नेताओं ने लगभग एक मिनट 10 सेकंड तक हाथ मिलाया, जिसे संबंधों की मजबूती के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है। साल 1949 के बाद दोनों देशों के बीच यह पहली बैठक है।

    शी तथा मा ने एक बंद कमरे में एक घंटे तक बैठक की।

    शी ने मा से कहा, "कोई भी ताकत हमें अलग नहीं कर सकती, क्योंकि हम भाई हैं, जिनकी रगों में एक ही खून दौड़ता है। हम एक परिवार हैं।"

    वहीं, मा ने कहा, "इस वक्त ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर शांति और क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देने की घोषणा की प्रशंसा हो रही है।"

    यह वार्ता ताइवान में राष्ट्रपति व संसदीय चुनाव के पहले हुई है, जिसमें स्वतंत्रता की तरफ झुकाव रखने वाली डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) की जीत की उम्मीद है।

    चीन व ताइवान के प्रतिनिधियों ने बैठक के निष्कर्ष के बारे में अलग-अलग संवाददाता सम्मेलन कर जानकारी दी।

    चीन के ताइवान मामलों के प्रमुख झांग झिजुन ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि ताइवान की आजादी की मांग करने वाली ताकतें चीन व ताइवान दोनों के लिए बड़ा खतरा हैं। ताइवान में होने वाले आगामी चुनाव में चीन हस्तक्षेप नहीं करेगा, लेकिन वह चीन-ताइवान के बीच के संबंधों को लेकर चिंतित है।

    झांग ने यह भी कहा कि ताइवान को चीन एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक में हिस्सेदारी के लिए आमंत्रित करता है।

    झांग ने कहा कि शी ने दोनों पक्षों से आम राजनीतिक सहमति का पालन करने का आह्वान किया है, जो साल 1992 में दोनों पक्षों द्वारा पहुंची गई सहमति की ओर इशारा करता है, जो एक चीन सिद्धांत को बढ़ावा देता है।

    झांग के अनुसार, शी ने कहा, "सात वर्षो से अधिक समय से चीन व ताइवान का शांतिपूर्वक विकास साल 1992 की सहमति का पालन करता है और ताइवान की आजादी का विरोध करता है।"

    उन्होंने कहा कि बीते सात वर्षो के दौरान दोनों पक्षों ने कुल 23 समझौतों पर हस्ताक्षर किए, 40 हजार से अधिक छात्रों का आदान-प्रदान हुआ, पर्यटकों की संख्या बढ़कर सालाना 80 लाख से अधिक हो गई तथा सालाना व्यापार 170 अरब डॉलर से अधिक हो गया।

    राष्ट्रपति शी के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे की मेजबानी करने वाले सिंगापुर ने कहा कि वह वार्ता को प्रोत्साहित कर व स्थल मुहैया कराकर खुश है।

    वहीं, शिखर वार्ता के खिलाफ शनिवार को ताइवान की राजधानी ताइपे में लगभग एक हजार लोग सड़कों पर उतरे और अपना विरोध जताया। ताइपे सोंगशान हवाई अड्डे पर अलग से एक विरोध-प्रदर्शन का आयोजन किया गया, जहां से मा ने सिंगापुर के लिए उड़ान भरी।

    उधर, चीन व ताइवान के बीच सिंगापुर के शांगरी-ला होटल में चल रही ऐतिहासिक शिखर वार्ता का विरोध करने वाले पांच ताइवानी नागरिकों को शनिवार को गिरफ्तार किया गया।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

  • केरल निकाय चुनाव में वाम मोर्चा को स्पष्ट बहुमत

    सानू जॉर्ज
    तिरुवनंतपुरम, 7 नवंबर (आईएएनएस)। केरल निकाय चुनाव के लिए शनिवार को हो रही मतगणना में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) को पीछे छोड़ते हुए वाम मोर्चा स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी इस बार बेहतर प्रदर्शन करती दिख रही है।

    वाम दलों ने यूडीएफ को ग्राम पंचायत और ब्लॉक पंचायत में बड़े अंतर से मात दी है, हालांकि जिला पंचायत चुनाव में दोनों दलों को सात-सात जिलों में जीत मिली है।

    छह निकायों में वाम मोर्चा को दो पर जीत मिल चुकी है, जबकि यूडीएफ के खाते में एक निकाय गया है तथा शेष तीन निकायों में त्रिशंकु जैसी स्थिति बनती दिख रही है।

    शाम पांच बजे तक सभी 941 ग्राम पंचायतों की मतगणना में एलडीएफ को 546 निकायों में, यूडीएफ को 368 निकायों में और भाजपा को 16 निकायों में बढ़त हासिल है। अन्य दल 15 निकायों में आगे चल रहे हैं।

    ब्लॉक स्तर पर एलडीएफ को 92, जबकि यूडीएफ को 59 सीटों पर जीत मिलती नजर आ रही है।

    नगर पालिका स्तर की मतगणना के रुझानों से स्पष्ट है कि एलडीएफ 44 और यूडीएफ 41 नगरपालिका में आगे है, जबकि भाजपा को सिर्फ एक नगरपालिका में जीत मिलती दिख रही है।

    2010 के निकाय चुनावों में यूडीएफ ने 65 फीसदी सीटें जीती थीं।

    वाम मोर्चा के स्टार प्रचारक व विपक्ष के नेता वी.एस. अच्युतानंदन ने कहा कि उनके मोर्चे की जीत मुख्यमंत्री ओमन चांडी के 'मुंह पर एक तमाचा है।'

    अच्युतानंदन ने कहा, "लोगों ने इस सरकार के भ्रष्ट तरीकों को करारा जवाब दिया है। चांडी ने जनविरोधी नीतियां अपनाईं और साथ ही अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की राजनीति खेली। सिर्फ वाम ही तानाशाही ताकतों को सिर उठाने से रोक सकता है और इसलिए लोगों ने हमें वोट दिया।"

    सुदूर दक्षिणी राज्य में यह वाम मोर्चा की धमाकेदार वापसी है।

    वर्ष 2010 के निकाय चुनावों में वाम मोर्चा को पांच में से तीन नगर निगमों में जीत मिली थी। वहीं नगर पालिका, जिला पंचायत, ब्लॉक पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ ने जीत हासिल की थी।

    इस बार केरल निकाय चुनाव के तहत 86 नगर पालिकाओं और छह नगर निगमों के अलावा 941 गांवों, 152 ब्लॉकों और 14 जिला पंचायतों की 21,871 सीटों के लिए चुनाव हुआ है।

    इस निकाय चुनाव में भाजपा को खुश होने की एक वजह मिल गई है, क्योंकि वह 34 सीटें जीतकर कांग्रेस को तीसरे स्थान पर धकेलते हुए तिरुवंनतपुरम नगर निगम में दूसरे स्थान पर आ गई है। कांग्रेस को महज 21 सीटें मिली हैं और वाम ने अब तक 42 सीटें जीती हैं।

    भाजपा 2010 में 500 सीटें जीतने में सफल रही थी, लेकिन शनिवार को शाम पांच बजे तक की मतगणना के अनुसार इस बार 1,100 सीटें भाजपा की झोली में जाती लग रही हैं।

    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी. मुरलीधरन ने कहा, "छोटे स्तर पर ही सही, मगर भाजपा का ऐसा प्रदर्शन अद्भुत घटना है।"

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वी. एम. सुधीरन ने कहा कि नतीजे दिखाते हैं कि यूडीएफ की पकड़ उतनी ज्यादा प्रभावित नहीं हुई है।

    सुधीरन ने कहा, "लेकिन फिर भी हमें इसकी उम्मीद नहीं थी, लेकिन हमारी पकड़ अछूती है। हां, तिरुवनंतपुरम नगर निगम में (जहां यह भाजपा के बाद तीसरे स्थान पर आ गई है) हमें भारी नुकसान उठाना पड़ा है।"

    उधर, केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने कहा कि यह लोगों की ओर से हमें दिया गया एक चेतावनी संकेत है।

    चेन्नीथला ने कहा, "2006 के विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चा को मिली जीत के बाद से हम राज्य में प्रत्येक चुनाव जीतते आ रहे हैं और इसलिए हमें हार की वजह की पड़ताल करनी होगी।"

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

  • केंद्र से कश्मीर को 80000 करोड़ रुपये का पैकेज

    श्रीनगर, 7 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जम्मू एवं कश्मीर के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से 80,000 करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की और कश्मीर मुद्दा सुलझाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के तीन-सूत्रीय फार्मूले को याद किया।

    दर्शकों से खचाखच भरे शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में मोदी ने जैसे ही यह घोषणा की, वहां उपस्थित लोगों ने खुशी और उत्साह से इसका स्वागत किया।

    आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए मोदी ने कहा, "यह कश्मीर के लिए मेरे सपने का अंत नहीं है, यह तो महज शुरुआत है।"

    मोदी ने कहा, "केवल दिल्ली का खजाना ही नहीं, दिल्ली का दिल भी कश्मीर वासियों के लिए हमेशा खुला रहेगा।"

    इस बहुप्रतीक्षित समावेशी पैकेज का लाभ राज्य के 2014 के बाढ़ पीड़ितों, किसानों, उद्यमियों, पर्यटन क्षेत्र, युवा रोजगार और बुनियादी ढांचे को मिलेगा।

    इसके अलावा प्रधानमंत्री ने जम्मू क्षेत्र के रामबन जिले में 450 मेगावाट क्षमता वाले बगलिहार विद्युत परियोजना के दूसरे चरण का उद्घाटन भी किया।

    मोदी ने कहा, "हमें अटल जी के दिखाए मार्ग पर चलना होगा। इस मंच से अटल जी ने कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत का नारा दिया था। मैं उन्हीं शब्दों को दोहराते हुए कहता हूं कि जम्मू एवं कश्मीर के विकास के लिए ये तीन स्तंभ जरूरी हैं।"

    पिछले वर्ष जब मैंने बाढ़ पीड़ितों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की घोषणा की थी, तब भी मैंने कहा था और आज फिर दोहराता हूं कि राज्य के तीनों क्षेत्रों जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के न्यायोचित विकास के लिए दिल्ली, राज्य सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगी।

    मोदी ने याद किया कि पिछले वर्ष उन्होंने दिवाली न मनाकर, बाढ़ पीड़ितों के लिए एकजुटता दिखाने के लिए कश्मीर आने को प्राथमिकता दी थी।

    मोदी ने कहा, "कश्मीर के लिए मेरा प्यार मुझे यहां खींच लाया है। कश्मीर ने काफी मुश्किलें सही है। मैंने बाढ़ पीड़ितों की तकलीफें महसूस की हैं।"

    मोदी ने कहा कि उन्हें कश्मीर के युवाओं से काफी उम्मीदें हैं।

    पर्यटन के बारे में मोदी ने कहा, "1.75 करोड़ भारतीय हर साल पर्यटन के लिए विदेश जाते हैं। हम उन 1.75 करोड़ भारतीय पर्यटकों में से सिर्फ पांच फीसदी पर्यटकों को कश्मीर यात्रा के लिए आकर्षित क्यों नहीं कर सकते? बुनियादी विकास के जरिए यहां और अधिक पर्यटन स्थल बनाए जा सकते हैं।"

    मोदी ने कहा कि उन्हें ऐसा पहला प्रधानमंत्री होने पर गर्व है जिसने कई बार जम्मू एवं कश्मीर की यात्रा की।

    देश के आर्थिक विकास के बारे में मोदी ने कहा, "17 महीने पूर्व कोई भी भारत के आर्थिक विकास की तुलना चीन से करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था, लेकिन आज कहा जाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था चीन से भी अधिक तेजी से बढ़ रही है।"

    मोदी ने कहा, "पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में पिछले 50 वर्षो में पहली बार भारत चीन से 10 स्थान ऊपर है।"

    जम्मू एवं कश्मीर के विकास पर जोर देते हुए मोदी ने कहा, "हम जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर 34,000 करोड़ रुपये खर्च करेंगे और उम्मीद है कि अगले तीन वर्षो में 12 घंटे की यात्रा घटकर साढ़े तीन घंटे की हो जाएगी।"

    यहां से फिर प्रधानमंत्री रामबन जिले के चंदरकोट कस्बे गए, जहां उन्होंने विद्युत परियोजना का उद्घाटन किया और जम्मू से श्रीनगर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को चार लेन का किए जाने की परियोजना भी लांच की।

    चंदरकोट में प्रधानमंत्री ने कहा राज्य को दिया गया 80,000 करोड़ रुपये का पैकेज राज्य को केंद्र की मदद की शुरुआत भर है और आने वाले दिनों में इस राशि का प्रभावी और कुशलता से उपयोग किया जाएगा।

    उन्होंने कहा, "जम्मू एवं कश्मीर राज्य की 15 से 20 फीसदी आबादी 1947 में आए शरणार्थियों की है और राज्य को दिया गया यह आर्थिक पैकेज उन शरणार्थियों और कश्मीर घाटी से विस्थापित कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन के लिए भी है।"

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

  • बिहार : जद (यू) 135 किलो, राजद 1 क्विंटल लड्डू बांटेगा

    मनोज पाठक
    पटना, 7 नवंबर (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा चुनाव में पड़े मतों की गिनती शुरू होने में अब चंद घंटे ही बचे हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों ने जश्न मनाने की तैयारी शुरू कर दी है। महागठबंधन में के घटक जनता दल (युनाइटेड) ने 135 किलो और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने एक क्विंटल लड्डू की एडवांस बुकिंग कराई है।

    सभी प्रमुख दलों के नेता अपनी पार्टी की जीत का दावा करते हुए जहां लड्डू की एडवांस बुकिंग करा चुके हैं, वहीं कुछ कार्यकर्ता फूल और मालाओं की भी अग्रिम बुकिंग कर जश्न मनाने की तैयारी में जुटे हुए हैं।

    सत्ताधारी महागठबंधन के नेता जहां जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे हैं, वहीं जश्न की बड़ी तैयारी भी है। जद (यू) के वरिष्ठ नेता और मंत्री श्याम रजक ने कहा, "मतगणना के बाद तो जश्न मनेगा ही। एसे मौके पर कार्यकर्ताओं का उत्साहित होना लाजिमी है। ऐसे में मिठाइयां बंटेंगी और दिवाली से तीन दिन पहले दिवाली मनेगी।"

    जद (यू) के नेता छोटू सिंह ने कहा कि पार्टी प्रदेश कार्यालय के लिए 135 किलो लड्डू की बुकिंग हुई है और एक बैंड पार्टी को बुक कराया गया है। इसके अलावा कार्यकर्ताओं को फूल और मालाओं का इंतजाम करने के आदेश दिए गए हैं।

    पटना स्टेशन के निकट फूल मंडी के दुकानदार अशोक कुमार बताते हैं कि कुछ नेताओं ने फूलों की लड़ी की बुकिंग कराई है। उन्होंने कहा, "वोट गिनती के दिन यह तय है कि फूलों की कीमत बढ़ जाएगी। अभी एक लड़ी की कीमत 10 रुपये है। एक लड़ी में 30 से 35 गेंदा के फूल होते हैं।"

    एक अन्य फूल दुकानदार रमेश कुमार भी बताते हैं कि कई नेता आकर फूल मालाओं की बुकिंग कर चुके हैं। यहां आने वाले नेता खुद को भाजपा, राजद और जद (यू) का बताते हैं।"

    वहीं, राजद ने एक क्विंटल लड्डू का ऑर्डर दिया है। पार्टी के प्रदेश महासचिव अरुण कुमार ने बताया कि पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि राजद के कार्यकर्ताओं को बहुत दिन बाद जश्न मनाने का अवसर मिलने वाला है। ऐसे में कोई भी कार्यकर्ता इस मौके को नहीं छोड़ना चाहेगा।

    इधर, भाजपा के कार्यकर्ता भी जश्न की तैयारी में जुटे हैं। भाजपा के राकेश कुमार बताते हैं कि लड्डू तैयार है और पटाखे भी तैयार हैं। उन्होंने हालांकि यह नहीं बताया कि उनकी पार्टी ने कितने लड्डू की बुकिंग कराई है।

    राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेता पहले ही कह चुके हैं कि इस बार बिहार में दो दिन दिवाली मनेगी।

    राकेश ने कहा, "11 नवंबर को बिहार दिवाली तो मनाएगा ही, उसके पहले रविवार को भी राजग की जीत पर बिहार में दिवाली मनेगी।"

    इधर, राजग में शामिल जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रवक्ता दानिश रिजवान भी कहते हैं कि जश्न तो तय है। मगर उन्होंने भी नहीं बताया कि पार्टी ने कितने लड्डू की बुकिंग कराई है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

  • केंद्र से कश्मीर को 80000 करोड़ रुपये का पैकेज

    श्रीनगर, 7 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जम्मू एवं कश्मीर के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से 80,000 करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की और कश्मीर मुद्दा सुलझाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के तीन-सूत्रीय फार्मूले को याद किया।

    जम्मू एवं कश्मीर की दिनभर की यात्रा पर पहुंचे मोदी ने यहां शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में एक रैली को संबोधित किया। उन्होंने जैसे ही यह घोषणा की, वहा उपस्थित लोगों ने खुशी और उत्साह से इसका स्वागत किया।

    लोगों ने तालियों और नारों से मोदी का स्वागत किया।

    आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए मोदी ने कहा, "यह कश्मीर के लिए मेरे सपने का अंत नहीं है, यह तो महज शुरुआत है।"

    मोदी ने कहा, "केवल दिल्ली का खजाना ही नहीं, दिल्ली का दिल भी कश्मीर के निवासियों के लिए हमेशा खुला रहेगा।"

    इस बहुप्रतीक्षित समावेशी पैकेज का लाभ राज्य के 2014 के बाढ़ पीड़ितों, किसानों, उद्यमियों, पर्यटन क्षेत्र, युवा रोजगार और बुनियादी ढांचे को मिलेगा।

    मोदी ने कहा, "हमें अटल जी के दिखाए मार्ग पर चलना होगा। इस मंच से अटल जी ने कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत का नारा दिया था। मैं उन्हीं शब्दों को दोहराते हुए कहता हूं कि जम्मू एवं कश्मीर के विकास के लिए ये तीन स्तंभ जरूरी हैं।"

    पिछले वर्ष जब मैंने बाढ़ पीड़ितों के लिए 1,000 करोड़ की घोषणा की थी, तब भी मैंने कहा था और आज फिर दोहराता हूं कि राज्य के तीनों क्षेत्रों जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के न्यायोचित विकास के लिए दिल्ली राज्य सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगी।

    मोदी ने याद किया कि पिछले वर्ष उन्होंने दीवाली न मनाकर, बाढ़ पीड़ितों के लिए एकजुटता दिखाने के लिए कश्मीर आने को प्राथमिकता दी थी।

    मोदी ने कहा, "कश्मीर के लिए मेरा प्यार मुझे यहां खींच लाया है। कश्मीर ने काफी मुश्किलें सही है। मैंने बाढ़ पीड़ितों की तकलीफें महसूस की हैं।"

    मोदी ने कहा कि उन्हें कश्मीर के युवाओं से काफी उम्मीदें हैं।

    पर्यटन के बारे में मोदी ने कहा कि 1.75 करोड़ भारतीय हर साल पर्यटन के लिए विदेश जाते हैं।

    मोदी ने कहा, "हम उन 1.75 करोड़ भारतीय पर्यटकों को कश्मीर यात्रा के लिए आकर्षित क्यों नहीं कर सकते? बुनियादी विकास के जरिए यहां और अधिक पर्यटन स्थल बनाए जा सकते हैं।"

    मोदी ने कहा कि वह कश्मीर को पर्यटकों का सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थल बनाना चाहते हैं।

    मोदी ने कहा कि उन्हें ऐसा पहला प्रधानमंत्री होने पर गर्व है जिसने कई बार जम्मू एवं कश्मीर की यात्रा की।

    देश के आर्थिक विकास के बारे में मोदी ने कहा, "17 महीने पूर्व कोई भी भारत के आर्थिक विकास की तुलना चीन से करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था, लेकिन आज कहा जाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था चीन से भी अधिक तेजी से बढ़ रही है।"

    मोदी ने कहा, "पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में पिछले 50 वर्षो में पहली बार भारत चीन से 10 स्थान ऊपर है।"

    जम्मू एवं कश्मीर के विकास पर जोर देते हुए मोदी ने कहा, "हम जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर 34,000 करोड़ रुपये खर्च करेंगे और उम्मीद है कि अगले तीन वर्षो में 12 घंटे की यात्रा घटकर साढ़े तीन घंटे की हो जाएगी।"

    मोदी जम्मू क्षेत्र के रामबन जिले के चंद्रकोट शहर गए हैं, जहां वे एक बिजली परियोजना और जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग की उधमपुर-बनिहाल विस्तार को चार लाइनों का बनाने की योजना का उद्घाटन करेंगे।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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