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Sunday, 29 May 2016 00:00

मप्र : गंगवार के समर्थन में आए कई नौकरशाह

भोपाल, 29 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में सोशल मीडिया पर अपनी बेबाक राय जाहिर करने पर बड़वानी जिले के जिलाधिकारी पद से हटाए गए अजय सिंह गंगवार के समर्थन में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से नौकरशाह सामने आने लगे हैं। कोई उनका (गंगवार) नाम लिए बगैर उनके साहस को सलाम कर रहा है तो कोई व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की पैरवी कर रहा है।

राज्य सरकार से लेकर नौकरशाहों के बीच बड़वानी के पूर्व जिलाधिकारी गंगवार चर्चा के केंद्र में हैं। उन्होंने अपने फेसबुक पृष्ठ पर गांधी और नेहरू की खुलकर सराहना की थी और परोक्ष रूप से मौजूदा केंद्र व राज्य सरकार पर तंज कसे थे। उनके इस पोस्ट से हंगामा मचा और उनकी जिलाधिकारी के पद से छुट्टी हो गई।

वाणिज्यकर विभाग के अतिरिक्त आयुक्त राजेश बहुगुणा ने अपने फेसबुक पृष्ठ पर परोक्ष रूप से गंगवार की सराहना की है। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना लिखा है, "लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवता की रक्षा करने और सच के साथ खड़े होने का साहस बहुत कम लोगों में होता है, ऐसे लोगों को मैं सलाम करता हूं।"

भारतीय वन सेवा के अधिकारी आजाद सिंह डाबास के हवाले से मीडिया में जो बयान आए हैं, उनमें कहा गया है, "व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिए, राज्य सरकार द्वारा गंगवार पर जो कार्रवाई की गई है, वह गलत है।" उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में सेवा शर्त के आड़े आने पर उस पर बहस की पैरवी की है।

इसी तरह एक अन्य आईएएस अफसर लक्ष्मीकांत द्विवेदी ने कहा है, "गंगवार ईमानदार अफसर हैं, वह राज्य सरकार की संपत्ति हैं। यदि सभी अफसर ऐसे ही हो जाएं, खासकर आईएएस अफसर तो राज्य की प्रगति दोगुनी हो जाएगी।"

यहां बताना लाजिमी है कि जिन अफसरों ने गंगवार की पैरवी करते हुए अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन किया है, वे अपनी-अपनी खासियतों की वजह से चर्चाओं में रहे हैं। अब एक बार फिर गंगवार के साथ खड़े होकर सभी सुर्खियां बटोर रहे हैं।

--आईएएनएस

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Sunday, 29 May 2016 00:00

मप्र : नि:शक्तजनों को नौकरी में साइकिल-चालन से छूट

भोपाल, 29 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश सरकार ने चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिए निर्धारित साइकिल-चालन की अनिवार्य योग्यता से नि:शक्तजनों को रियायत देने का फैसला किया है।

आधिकारिक तौर पर शनिवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि नि:शक्तजन आवेदनकर्ताओं को छूट का लाभ शासकीय कार्यालयों के अलावा विभिन्न विभागों के अंतर्गत आने वाले निगमों, मण्डलों, सार्वजनिक उपक्रमों, आयोगों, विश्वविद्यालयों, शासकीय स्वायत्त संस्थाओं और राज्य शासन की अनुदान प्राप्त संस्थाओं में होने वाली भर्ती प्रक्रिया में भी मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के विभिन्न विभागों के अंतर्गत चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों की भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता के साथ साइकिल-चालन भी अनिवार्य है। इन शर्तो में राज्य सरकार ने नि:शक्त आवेदनकर्ताओं के लिए विशेष रियायत देने का फैसला किया है। अब नि:शक्तजनों के लिए साइकिल-चालन की अनिवार्यता नहीं होगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संदर्भ में परिपत्र जारी कर दिया है।

--आईएएनएस

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Sunday, 29 May 2016 00:00

बुंदेलखंड के दूसरा राजस्थान बनने का खतरा : राजेंद्र सिंह

संदीप पौराणिक
छतरपुर (मप्र), 29 मई (आईएएनएस)। जलपुरुष के नाम से चर्चित और प्रतिष्ठित स्टॉकहोम वाटर प्राइज से सम्मानित राजेंद्र सिंह ने सूखा की मार झेल रहे बुंदेलखंड के दूसरे राजस्थान (रेगिस्तान) बनने की आशंका जताई है।

सूखा प्रभावित क्षेत्रों में चार सामाजिक संगठनों द्वारा निकाली जा रही जल-हल यात्रा में हिस्सा लेने आए राजेंद्र सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "राजस्थान तो रेत के कारण रेगिस्तान है, मगर बुंदेलखंड हालात के चलते रेगिस्तान में बदल सकता है। यहां के खेतों की मिट्टी के ऊपर सिल्ट जमा हो रही है, जो खेतों की पैदावार को ही खत्म कर सकती है।"

सिंह ने कहा कि जल-हल यात्रा के दौरान टीकमगढ़ और छतरपुर के तीन गांव की जो तस्वीर उन्होंने देखी है, वह डरावनी है। यहां इंसान को खाने के लिए अनाज और पीने के लिए पानी आसानी से सुलभ नहीं है। जानवरों के लिए चारा और पानी नहीं है। रोजगार के अभाव में युवा पीढ़ी पलायन कर गई है। इतना ही नहीं, नदियां पत्थरों में बदलती नजर आती हैं, तो तालाब गड्ढे बन गए हैं।

उन्होंने कहा कि इन सब स्थितियों के लिए सिर्फ प्रकृति को दोषी ठहराना उचित नहीं है। इसके लिए मानव भी कम जिम्मेदार नहीं है। ऐसा तो है नहीं कि बीते तीन वर्षो में बारिश हुई ही नहीं है। जो बारिश का पानी आया उसे भी हम रोक नहीं पाए। सरकारों का काम सिर्फ कागजों तक रहा। यही कारण है कि बीते तीन वर्षो से यहां सूखे के हालात बन रहे हैं। अब भी अगर नहीं चेते तो इस इलाके को दूसरा राजस्थान बनने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।

जलपुरुष का मानना है कि अब भी स्थितियों को सुधारा जा सकता है, क्योंकि मानसून करीब है। इसके लिए जरूरी है कि बारिश के ज्यादा से ज्यादा पानी को रोका जाए, नदियों को पुनर्जीवित करने का अभियान चले, तालाबों को गहरा किया जाए, नए तालाब बनाए जाएं। बारिश शुरू होने से पहले ये सारे प्रयास कर लिए गए, तो आगामी वर्ष में सूखा जैसे हालात को रोका जा सकेगा, अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर क्या होगा, यह तो ऊपर वाला ही जाने।

एक सवाल के जवाब में सिंह ने आईएएनएस से कहा, "अब तक दुष्काल का असर सीधे तौर पर गरीबों और जानवरों पर पड़ता था, मगर इस बार का असर अमीरों पर भी है। हर तरफ निराशा का भाव नजर आ रहा है, जो समाज के लिए ठीक नहीं है। वहीं मध्य प्रदेश की सरकार इससे अनजान बनी हुई है। यहां देखकर यह लगता ही नहीं है कि राज्य सरकार इस क्षेत्र के सूखे और अकाल को लेकर गंभीर भी है।"

देश के चार सामाजिक संगठनों स्वराज अभियान, एकता परिषद, नेशनल अलायंस ऑफ पीपुल्स मूवमेंट (एनएपीएम) और जल बिरादरी ने मिलकर सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों से हर किसी को जागृत करने और जमीनी हालात जानने के लिए जल-हल यात्रा निकाली है। यह यात्रा मराठवाड़ा के बाद बुंदेलखंड में चल रही है।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में उन्हें ऐसा लगा ही नहीं कि राज्य सरकार सूखा के प्रतिबद्घ है। यहां न तो टैंकरों से पानी की आपूर्ति हो रही है, न तो राशन का अनाज मिल रहा है। इतना ही नहीं, जानवर मर रहे हैं। उनके लिए न तो पानी का इंतजाम किया गया है और न ही चारा शिविर शुरू हुए हैं।

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राज्य सरकारों के साथ केंद्र सरकार को आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं। प्रभावित क्षेत्रों के प्रति व्यक्ति को पांच किलो प्रतिमाह अनाज देने, गर्मी की छुट्टी के बावजूद विद्यालयों में मध्याह्न भोजन देने, सप्ताह में कम से कम तीन दिन अंडा या दूध देने और मनरेगा के जरिए रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। ये निर्देश मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में तो सफल होते नजर नहीं आए।

उल्लेखनीय है कि बुंदेलखंड मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है। मप्र के छह जिले और उप्र के सात जिले इस क्षेत्र में आते हैं, हर तरफ सूखे से हाहाकार मची हुई है। जल स्रोत सूख गए हैं।

--आईएएनएस

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Sunday, 29 May 2016 00:00

पीएचडी डिग्रीधारक पेट के लिए काट रहा बाल

मनोज पाठक
रांची, 29 मई (आईएएनएस)। एक ओर जहां देश की राजनीति में ऊंचे-ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों की शैक्षणिक डिग्री पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं झारखंड की राजधानी रांची में पीएचडी डिग्री धारक और कॉलेज में विजिटिंग प्रोफेसर का काम करने वाले एक व्यक्ति को अपने परिवार का पेट पालने के लिए फुटपाथ पर सैलून चलाना पड़ रहा है।

रांची के महात्मा गांधी रोड के किनारे फुटपाथ पर अपनी सैलून चलाने वाले रामनगर निवासी अशरफ हुसैन इस दुकान पर खुद ग्राहकों की दाढ़ी और बाल काटते हैं। नाई का काम करने वाले डा. अशरफ न केवल परास्तानक (एमए) की पढ़ाई पूरी की है, बल्कि 'ए कम्परेटिव एंड एनालिटिकल स्टडी आफ साऊथ उर्दू स्टोरी रायटर इन झारखण्ड' विषय पर शोध भी कर चुके हैं।

अशरफ आईएएनएस को बताते हैं कि वर्ष 2015 से मौलाना आजाद कलेज में बतौर 'विजिटिंग प्रोफेसर' बच्चों को पढ़ा रहे हैं, परंतु कॉलेज से मिलने वाले प्रतिमाह तीन हजार रुपये से घर नहीं चलता इसलिए पैतृक व्यवसाय हजाम का भी काम करना पड़ता है।

क्षेत्र में 'डॉक्टर' के नाम से प्रसिद्घ अशरफ कहते हैं कि वह भले ही फुटपाथ पर दो कुर्सी और एक आइना लेकर दुकान चलाते हों परंतु उनके पास ग्राहकों की कोई कमी नहीं है। उनके पास इतने ग्राहक आ जाते हैं जिनसे मिले पैसे से उनके परिवार का गुजारा चल जाता है।

अशरफ कहते हैं कि अगर वह चाहते तो उन्हें निजी कम्पनी में नौकरी मिल जाती लेकिन नौकरी में सिमट कर रह जाने के डर के कारण उन्होंने विरासत में मिले इस नाई के काम को करना पसंद किया।

अशरफ ने कहा कि बचपन से ही उन्हें उच्च शिक्षा पाने की लालसा थी लेकिन पारिवारिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह बिना कुछ कमाए अपनी पढ़ाई कर सकते थे। इस कारण वह अपने पिता की हजामत की दुकान पर ही अपना जीवन गुजारने लगे लेकिन उनमें पढ़ाई की ललक कम नहीं हुई। काम करते हुए ही उन्होंने 2011 में पीएचडी की उपाधि हासिल की।

इन्होंने अनवरी बेगम और सबूही तारिक जैसी झारखण्ड की महिलाओं पर किताब भी लिखी है। किताब प्रकाशित करवाने को जब उनके पास पैसे नहीं थे तब इन्होंने दोस्तों से मदद मांगी और तब जाकर इस किताब की 500 कॉपी छपवाई गई। अशरफ का दावा है कि इस विषय पर लिखी उनकी यह किताब अपने आप में पहली है।

डी-लिट् की उपाधि हासिल करने की चाहत रखने वाले अशरफ के पिता ने कभी स्कूल का रुख नहीं किया लेकिन अपने बच्चों को अच्छी तालीम दी। 1989 में इंटर की परीक्षा के बाद अशरफ के सिर पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। लगभग दस सालों तक किताबों से नाता टूट गया फिर इन्होंने 2002 में स्नातक किया और फिर तमाम कठिनाइयों का सामना करते हुए पीएचडी तक की।

अशरफ को हिन्दी भाषा से भी बहुत लगाव है। यही कारण है कि वह अपने पुत्र को हिन्दी विषय में शोध कराना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उनका पुत्र अभी मदरसा में रहकर पढ़ाई कर रहा है परंतु वह हिन्दी में उसे शोध कराना चाहेंगे, जिससे घर में उर्दू और हिन्दी का संगम हो सके।

ग्राहक भी अशरफ के पास बाल बनवाकर और सेविंग कराकर खुश होते हैं। ग्राहकों का मानना है कि इतने शिक्षित व्यक्ति से सेविंग करा कर वे खुद गौरवान्वित महसूस करते हैं।

--आईएएनएस

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Sunday, 29 May 2016 00:00

बुंदेलखंड की समस्याओं को लेकर उप्र सरकार गंभीर : आयुक्त


विद्या शंकर राय
लखनऊ , 29 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त प्रवीर कुमार ने कहा कि बुंदेलखंड में पेयजल आपूर्ति और सूखे की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बेहद गंभीर हैं और इस संकट निपटने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस बार अच्छी बारिश होने की संभावना है, लिहाजा पानी के संचय को लेकर कई कारगर कदम उठाए जा रहे हैं।

उप्र के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में कहा, "इस बार मौसम विभाग ने अच्छी बारिश की सम्भावना जताई है। बुंदेलखंड में जल संकट दूर करने के लिये इस बार पानी संचय की बेहतर तैयारी की जारी है।"

उन्होंने बताया कि दीर्घकालिक उपाय के तहत बुंदेलखंड में 2000 खेत तालाब तैयार किए जा रहे हैं जिसमें पानी का संचय किया जाएगा। इनका उपयोग जरूरतों के हिसाब से किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत यदि कोई किसान अपना खेत तालाब के लिए उपलब्ध कराता है तो सरकार उन्हें 50 फीसदी अनुदान देगी।

आयुक्त के मुताबिक इसके अतिरिक्त 197 तालाब बनाने की योजना है। यह एक हेक्टेयर से ऊपर वाले होंगे। इनमें भी बारिश के पानी का संचय किया जाएगा।

आयुक्त से जब पूछा गया कि बुंदेलखंड में पेयजल की समस्या विकराल रूप धारण किए हुए है। पुराने हैंडपम्पों के जलस्तर काफी नीचे चले गए हैं। पेयजल के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है तो उन्होंने कहा कि पेयजल संकट को लेकर मुख्यमंत्री भी बेहद गम्भीर हैं। उनके निर्देशन में युद्घस्तर पर काम चल रहा है।

कुमार ने बताया, "बुंदेलखंड में पेयजल आपूर्ति को सुधारने के लिये एक अभियान चलाया जा रहा है। 14वें वित्त आयोग से मिली धनराशि के तहत 3500 हैंडपम्पों को उखाड़ कर फिर से गाड़ा जा रहा है। नए हैंडपम्प भी लगाए जा रहे हैं। 440 पानी के टैंकरों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।"

उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में पंचायतों को भी टैंकर किराए पर लेकर लोगों को पानी मुहैया कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। जल निगम के टैंकर भी सेवाएं दे रहे हैं।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के आदेश पर विधायकों को भी अपनी निधि से 100 नए हैंडपम्प लगवाने व 100 पुराने हैंडपम्पों को निकाल कर दुबारा लगाने का काम कराने का अधिकार दिया गया है। अब अपने विधानसभा क्षेत्र में पेयजल संकट दूर करने में विधायक भी सहयोग करेंगे। यह अधिकार पूरे राज्य के विधायकों को दिया गया है।

प्रदेश में आमतौर पर हर वर्ष किसानों को खाद और बीज की किल्लत से जूझना पड़ता है। इस सवाल पर प्रवीर कुमार ने कहा कि खाद, बीज को लेकर सरकार पूरी तरह से तैयार है। सरकार के पास पहले भी खाद, बीज की कमी नहीं थी। इस वर्ष भी जिला व मंडल स्तर पर यूरिया व डीएपी खाद की बेहतर आपूर्ति के निर्देश दे दिए गए हैं। सरकार यूरिया व डीएपी की पहले से व्यवस्था कर रही है।

बिजली संकट से कृषि कार्य में बाधा के सवाल पर कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि किसानों को बिजली की आपूर्ति के लिए सरकार सजग है। कृषि कार्यो के लिए बिजली की कमी नहीं होने दी जाएगी।

प्रवीर कुमार के मुताबिक एक मई से 16 मई तक बुंदेलखंड में औसतन 20.43 घंटे बिजली की आपूर्ति की गई जिसमें ग्रामीण स्तर पर 14.43 घंटे, तहसील स्तर पर 16.41 घंटे और जिला स्तर पर 20 घंटे बिजली की आपूर्ति हुई।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन को लेकर सरकारी तैयारी के बारे में कुमार ने कहा कि इस बीमा योजना के तहत किसानों को खरीफ की फसल पर 2 प्रतिशत और रवि की फसल पर 1़5 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा।

आयुक्त ने बताया कि प्रीमियम का आधा हिस्सा केंद्र सरकार व आधा हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। फसल कटने के 14 दिनों बाद तक किसानों को फसल बीमा का लाभ मिलेगा। यदि फसल कटने के 14 दिनों के बाद फसल नष्ट हो जाती है तो उस स्थिति में भी सरकार किसानों की सहायता करेगी।

--आईएएनएस

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न्यूयॉर्क, 28 मई (आईएएनएस)। अगर आपको लगता है कि विभिन्न सोशल मीडिया वेबसाइटों पर महिलाओं को अश्लील टिप्पणियां केवल पुरुष ही करते हैं, तो आपको गलतफहमी है। नए शोध के मुताबिक, माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर जिन महिलाओं को अश्लील टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है, उनमें से आधी टिप्पणियां महिलाओं द्वारा की गई होती हैं।

तीन सप्ताह तक ब्रिटेन में ट्विटर उपयोगकर्ताओं का विश्लेषण करने के बाद ब्रिटिश थिंकटैंक 'डेमोस' ने पाया कि ट्विटर पर अश्लील टिप्पणियों के जिम्मेदार पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी हैं।

एक्सप्रेस डॉट को डॉट यूके की एक रपट के मुताबिक, शोध दल ने ट्विटर पर 'स्लट' तथा 'व्होअर' जैसे शब्दों को अश्लीलता की श्रेणी में रखकर उपयोगकर्ताओं के अकाउंट को खंगाला।

शोधकर्ताओं को ट्वीट में ऐसे दो लाख से अधिक शब्द मिले, जिसे 80 हजार लोगों को भेजा गया था।

वेबसाइट के मुताबिक, शोधकर्ता एलेक्स क्रासोदोम्स्की-जोन्स ने कहा, "निष्कर्ष इस बात को दर्शाता है कि अपने अकाउंट पर इस तरह के शब्दों को देखकर महिलाओं को कितनी पीड़ा पहुंचती होगी।"

क्रासोदोम्स्की ने कहा, "ऐसे अश्लील शब्द केवल ट्विटर तक ही सीमित नहीं हैं। अन्य सोशल मीडिया वेबसाइटों पर भी इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है।"

निष्कर्ष में यह बात सामने आई कि ट्विटर के 6,500 उपयोगकर्ताओं को इस तरह के 10 हजार शब्दों को झेलना पड़ा।

--आईएएनएस

चैतन्य मल्लापुर एवं वीडियो वालंटियर्स

यह एक गैर जमानती आपराधिक कार्रवाई है। बावजूद इसके भारत में नालों और खुले शौचालयों की हाथ से सफाई बदस्तूर जारी है। देश में 7,94,390 शौचालय ऐसे हैं जिनके मल हाथ से उठाए जाते हैं। पूरे देश में 13 लाख दलित हाथ से गंदगी साफ करने वाले सफाईकर्मी हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं और यही काम उनके जीने का आधार है।

एक वैश्विक पहल के तहत वंचित समुदायों की स्थिति से आगाह कराने वाले वीडियो वालंटियर्स से सुरेंद्रनगर जिले के ध्रांगधरा शहर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चारू मोरी ने कहा, "हमारे पास अवैध की श्रेणी में आने वाला कोई काम नहीं है। हाथ से गंदगी की सफाई प्रतिबंधित कार्य है।"

मोरी ने कहा कि इस इलाके में हाल के वीडियो क्लिप में सफाई कर्मी हाथ से सफाई करते दिख रहे हैं तो क्या हुआ? ये सारे ठेकेदार के कर्मचारी हैं। ये लोग उनकी (ठेकेदार की) जिम्मेदारी हैं।

ध्रांगधरा की स्थिति से स्पष्ट हो जाता है कि क्यों पूरे भारत में प्राय: दलित समुदाय के हजारों लोगों का गंदे नाले में मरना और हाथ से मैले की सफाई करना जारी है।

यह प्रचलन उन शहरों में भी है जहां नाले की सफाई के लिए सफाई मशीनें उपलब्ध हैं।

राज्यसभा में केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री विजय सांपला ने गत 5 मई को कहा कि पूरे भारत में 12,226 हाथ से सफाई करने वाले सफाई कर्मी चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 82 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में ही हैं। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से हकीकत से कम हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार गुजरात में केवल दो ही ऐसे सफाईकर्मी हैं।

हाथ से गंदगी की सफाई का जारी रहने का संबंध हिन्दू जाति व्यवस्था से है। पूरे भारत में 13 लाख दलित हाथ से गंदगी साफ करने वाले सफाईकर्मी हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं और यही काम उनके जीने का आधार है।

प्राचीन शौचालयों का अस्तित्व हाथ से गंदगी की सफाई का मुख्य कारण है। इन शौचालयों से मैला हटाने का काम हाथ से होता है।

सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना के आंकड़ों के आधार पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने लोकसभा में इस साल 25 फरवरी को कहा था कि देश में 167,487 परिवारों में प्रति परिवार एक व्यक्ति हाथ से सफाई करने वाला सफाईकर्मी है।

जम्मू एवं कश्मीर को छोड़ कर पूरे देश में हाथ से सफाई करने वाले सफाईकर्मी को नियोजित करना निषिद्ध है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 72 प्रतिशत अस्वास्थ्यकर शौचालय सिर्फ आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, जम्मू एवं कश्मीर, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 26 लाख सूखे शौचालय हैं। इसके अतिरिक्त 1,314,652 ऐसे शौचालय हैं जिनके मल खुले नालों में बहाए जाते हैं।

इतना ही नहीं 7,94,390 शौचालय ऐसे हैं जिनके मल हाथ से उठाए जाते हैं।

इंडिया स्पेंड की पहले की रिपोर्ट के अनुसार 12.6 प्रतिशत शहरी और 55 प्रतिशत ग्रामीण परिवार खुले में शौच करते हैं। शौचालय होने के बावजूद पूरे भारत में 1.7 प्रतिशत परिवार खुले में शौच करता है।

उत्तर प्रदेश में आधिकारिक रूप से 10,016 हाथ से गंदगी साफ करने वाले सफाईकर्मी हैं जिनमें 2404 शहर में और 7612 ग्रामीण इलाके में हैं।

बड़े पैमाने पर सूखे शौचालयों के कारण 2009 में उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हुई थीं और शिशु मृत्यु दर सर्वाधिक 110 प्रति हजार हो गई थी।

सन 2010 में सरकार ने इस जिले में 'डलिया जलाओ' अभियान शुरू किया था। डलिया प्रतीक थी उस सामान की जिसमें मानव मल उठाया जाता है। एक साल के अंदर 2750 हाथ से गंदगी साफ करने वालों को इस काम से मुक्ति दी गई थी।

नतीजा है कि 2010 से इस जिले में पालियो का कोई नया मामला सामने नहीं आया है।

महाराष्ट्र में सबसे अधिक 68016 हाथ से गंदगी साफ करने वाले परिवार हैं जो पूरे देश में ऐसे परिवारों का 41 प्रतिशत है।

महाराष्ट्र के बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पंजाब का स्थान हैं। इन पांचों राज्यों में कुल मिलाकर देश के 81 प्रतिशत हाथ से सफाई करने वाले सफाईकर्मी के परिवार हैं।

इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट के अनुसार रेलवे देश में हाथ से सफाई करने वाले सफाई कमियों का सबसे बड़ा नियोक्ता है।

सरकार ने 2019 तक हाथ से गंदगी की सफाई से देश को मुक्ति दिलाने का लक्ष्य रखा है।

(आंकड़ा आधारित, गैरलाभकारी, लोकहित पत्रकारिता मंच, इंडियास्पेंड डॉट ऑर्ग के साथ एक व्यवस्था के तहत जहां चैतन्य मल्लापुर नीति विश्लेषक हैं। लेख में व्यक्त विचार इंडियास्पेंड के हैं)

--आईएएनएस

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लखनऊ, 27 मई (आईएएनएस/आईपीएन)। अंगों के दान के प्रति लोगों को जागरूक करने, अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी जानकारी देने और इससे जुड़ी धार्मिक भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से लखनऊ छावनी स्थित बेस अस्पताल के तत्वावधान में सूर्या प्रेक्षागृह में अंगदान के लिए जागरूकता कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय संगोष्ठी शुक्रवार को आयोजित की गई।

सेना चिकित्सा कोर केन्द्र एवं कॉलेज के सेनानायक एवं एएमसी अभिलेख प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल एमडी वेंकटेश ने संगोष्ठी का उद्घाटन किया।

बेस अस्पताल के सेनानायक ब्रिगेडियर एस.के. गुप्ता ने इस अवसर पर अपने संबोधन में अंगदान की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि इसके माध्यम से लोगों के जीवन को बचाया जा सकता है।

ब्रिगेडियर गुप्ता ने कहा कि एक दानकर्ता अपने शरीर के अंगों -नेत्र, हर्ट वाल्व, ब्लड वेसल्स, हड्डी, त्वचा, मांसपेशियां, टेंडन्स, यहां तक कि चेहरा एवं उंगलियों- का दान कर 100 लोगों के जीवन को बचा सकता है।

संगोष्ठी के दौरान किडनी, लीवर एवं कोर्निया प्रत्यारोपण पर भी चर्चा हुई, जिसमें दिल्ली स्थित सेना अस्पताल (आर एण्ड आर) द्वारा सशस्त्र बलों के विभिन्न केंद्रों के माध्यम से देशभर में किए जा रहे अंग प्रत्यारोपण के बारे में भी जानकारी दी गई।

ताजा आंकड़े के अनुसार, सेना अस्पताल द्वारा 1700 से अधिक किडनी एवं 110 लीवर को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया है।

-- आईएएनएस

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Friday, 27 May 2016 00:00

बुंदेलखंड में न राशन मिल रहा और न काम

टीकमगढ़ (मप्र), 27 मई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने भले ही देश के सूखा प्रभावित 12 राज्यों में सभी को रियायती दर पर अनाज देने के साथ रोजगार मुहैया करने के निर्देश दे दिए हों, मगर जमीनी स्तर पर अब तक इसका अमल शुरू नहीं हुआ है। बुंदेलखंड के मध्य प्रदेश वाले हिस्से में इस आदेश का कोई असर नहीं दिख रहा है।

देश के सूखाग्रस्त महाराष्ट्र के मराठवाड़ा की पांच दिनों की यात्रा के बाद चार सामाजिक संगठनों स्वराज अभियान, एकता परिषद, नेशनल अलायंस ऑफ पीपुल्स मूवमेंट (एनएपीएम) और जल बिरादरी की जल-हल यात्रा शुक्रवार को बुंदेलखंड पहुंची।

सूखाग्रस्त क्षेत्रों के हालात जानने और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सूखाग्रस्त इलाकों के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देशों से लोगों को अवगत कराने के लिए जल-हल यात्रा का दूसरा चरण शुक्रवार को बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले के आलमपुरा गांव से शुरू हो गया।

जल-हल यात्रा के पहले दिन आलमपुरा, बेला और छतरपुर जिले के गरौली गांव पहुंची। यहां पहुंचे चार सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के सामने लोगों ने बेहिचक स्वीकारा कि उन्हें पांच किलो प्रति व्यक्ति के हिसाब से अनाज नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं, विद्यालयों में मध्याह्न भोजन भी नहीं दिया जा रहा है।

स्वराज अभियान के संयोजक योगेंद्र यादव ने ग्रामीणों को बताया कि देश की सबसे बड़ी अदालत सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र व राज्य सरकारों को सूखा प्रभावित क्षेत्रों के प्रति व्यक्ति को पांच किलो प्रतिमाह अनाज देने, गर्मी की छुट्टी के बावजूद विद्यालयों में मध्याह्न भोजन देने, सप्ताह में कम से कम तीन दिन अंडा या दूध देने तथा मनरेगा के जरिए रोजगार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

यादव ने बच्चों से पूछा कि क्या उन्हें स्कूल की छुट्टी के दौरान मध्याह्न भोजन मिल रहा है, तो हर स्थान से एक ही जवाब आया, 'नहीं।' राशन के बारे में पूछे जाने पर भी यही उत्तर मिला। इतना ही नहीं, लोग रोजगार के लिए भी भटक रहे हैं। लोगों ने बताया कि न तो पानी का इंतजाम है और न ही जानवरों के लिए भूसे की व्यवस्था की गई है।

जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने ग्रामीणों से कहा कि उन्हें अपना हक पाने के लिए तैयार रहना होगा। जरूरत पड़े, तो उन्हें लोकतंत्र में मिली अपनी ताकत वोट से उन लोगों को सबक सिखाना चाहिए जो उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए सामने नहीं आते हैं।

जल जन जोड़ो के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने विपत्ति काल में लोगों से धीरज रखने की अपील की और कहा कि बारिश के मौसम में पानी को रोकने के वे सारे प्रयास किए जाएं जो जरूरी हैं। सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं रहा जा सकता।

पूर्व विधायक और किसान नेता डॉ. सुनीलम ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार कहती तो यह है कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में हर संभव मदद दी जा रही है, मगर हकीकत तो यहां आकर पता चल रहा है। इस मौके पर पवन राजावत व भगवान सिंह ने भी बुंदेलखंड की समस्याओं को गिनाया।

इस मौके पर किसानों और महिलाओं ने यात्रा में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं को बताया कि बिजली के कनेक्शन काट दिए गए हैं और बैंकों से वसूली के नोटिस आ रहे हैं। वसूली करने वालों द्वारा उन्हें धमकाया भी जा रहा है।

यादव ने ग्रामीणों को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में प्रभावितों की मदद के लिए सरकारों को जो निर्देश दिए हैं, उन्हें जन-जन तक पहुंचाने के लिए जल-हल यात्रा शुरू की गई है। इतना ही नहीं, वे वास्तविकता का ब्यौरा एक अगस्त को होने वाली पेशी में करेंगे। यह यात्रा मध्य प्रदेश के अलावा, उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के जिलों में पहुंचेगी। यात्रा का समापन एक मई को महोबा में होगा।

-- आईएएनएस

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Tuesday, 24 May 2016 00:00

मप्र : पूर्व अफसर ने मंत्री रामपाल लगाया साजिश का आरोप

भोपाल, 24 मई (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में पदस्थ रहे पूर्व सहायक आपूर्ति अधिकारी कालूराम जैन ने राजस्व मंत्री रामपाल सिंह पर गंभीर आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि मंत्री के चहेते राशन दुकानों के कोटेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने पर साजिश रचकर पहले उन्हें रिश्वत लेने के आरोप में फंसाया गया और बाद में सेवा से बर्खास्त करा दिया गया है।

जैन ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि वह रायसेन जिले में पदस्थ थे, ऐसे में उनकी जिम्मेदारी थी कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों का नियमानुसार आवंटन किया जाए और उनको प्राधिकार पत्र जारी किए जाएं। इसके मुताबिक उन्होंने बरेली क्षेत्र की दुकानों की जांच की।

जैन का आरोप है कि यह राशन दुकानें सहकारी संस्थाओं द्वारा संचालित की जानी चाहिए थी, मगर उसे अवैध लोग चला रहे थे। बरेली क्षेत्र में 131 दुकानें अनाधिकृत लोगों द्वारा चलाए जाने के मामले सामने आए।

उन्होंने 21 दुकान संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की। 32 दुकानों को कालाबाजारी करने पर निरस्त किया गया। इससे तिलमिलाए मंत्री के चहेतों ने उनके खिलाफ ही साजिश रच दी।

जैन का आरोप है कि उन्हें साजिश रचकर रिश्वत लेने के मामले में 28 मार्च, 2012 को फंसाया गया।

जैन के मुताबिक, एक आरक्षक द्वारा उनका जांच प्रतिवेदन बनाया गया है, इस प्रतिवेदन की जांच का जिम्मा सात आईएएस और आईपीएस अफसरों की छानबीन समिति सौंपा गया। इस प्रकरण में विशेष अदालत ने जैन के खिलाफ फैसला दिया। उसके बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है।

जैन द्वारा लगाए गए आरोपों पर राजस्व मंत्री रामपाल सिंह का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया गया। लेकिन बताया गया कि वे बैतूल के घोड़ाड़ोंगरी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में व्यस्त है, लिहाजा बात होना संभव नहीं है।

--आईएएनएस

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