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युवा अभियंता बच्चों को दे रहे रोबोट बनाने की प्रेरणा

जयदीप सरीन
चंडीगढ़, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। अक्षय आहूजा मात्र 23 साल के हैं, लेकिन उनकी कम उम्र नौ साल के बच्चों को भी अपने अभियंत्रण का कौशल सिखाने और उन्हें रोबोट बनाने में मदद करने से नहीं रोक पाई। वह नई दिल्ली में एक ऐसे रोबोटिक शो के आयोजन की योजना बना रहे हैं, जिसमें 20 हजार बच्चे भाग लेंगे।

आहूजा खुद इंजीनियर हैं। उनका 'रोबोटिक्स एजुकेशन वर्ल्ड' अभी शुरू ही हुआ है। वह चाहते हैं कि विज्ञान बच्चों के लिए एक मजे की चीज हो और इसमें रोबोटिक्स के जरिए उनकी मदद की जाए।

आहूजा ने इंजीनियरिंग के छात्रों की मदद के लिए वर्ष 2013 में अपनी कंपनी की शुरुआत की थी। उन्होंने जल्दी ही युवाओं के दिमाग में रुचि जगाने का तरीखा खोज लिया। यहां तक कि उन्हें लगा कि स्कूली बच्चों को भी इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी का कौशल सिखाया जा सकता है।

मूलत: लुधियाना के रहने वाले आहूजा ने आईएएनएस को से कहा, "विचार यह था कि चीजों को सैद्धांतिक से अधिक व्यावहारिक बनाया जाए। शोध करते हुए मैंने महसूस किया कि शिक्षा प्रणाली छात्रों को यह जानने के लिए प्रोत्साहित नहीं करती कि किस तरह से सिद्धांत बनाए गए। मैंने अपने दृष्टिकोण की जांच करने के लिए एक छात्र को प्रशिक्षित किया जिसका नाम अपना रोबोट बनाने के लिए 'इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड' में दर्ज हुआ।"

वह बताते हैं, "हमारी कंपनी में इंजीनियरिंग के मात्र 29 छात्र थे जिन्होंने कार्यशाला में भाग लिया था। जब कार्यशाला चल रही थी तभी मैंने महसूस किया कि इसमें थोड़ा परिवर्तन कर दिया जाए तो इसमें स्कूली बच्चों की भी रुचि हो सकती है।"

आहूजा ने कहा, "कॉलेज के छात्रों के साथ काम करते हुए वर्ष 2013 में मैंने नौ साल के एक बच्चे से वहीं प्रशिक्षण लेने को कहा जिसे वे छात्र ले रहे थे। छह माह के प्रशिक्षण के समाप्त होने पर मैंने पाया कि बच्चे ने इंजीनियरों से अधिक सीख लिया है। उसके बाद मैंने नौ साल के कुछ और बच्चों को प्रशिक्षण दिया। वे आईआईटी दिल्ली गए और उन्होंने इंजीनियरों के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। कुल 32 टीमों में वे तीसरे स्थान पर आए।"

अक्षय ने उत्साहित होकर बताया कि उन्हीं बच्चों में से वह नौ साल का बच्चा भी था, जिसका नाम 'इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड' में दर्ज है।

आहूजा देश का सबसे बड़ा रोबोटिक आयोजन करने पर काम कर रहे हैं। जुलाई में नई दिल्ली में स्कूली बच्चों के लिए 'बिल्ड योर बोट' (बीवाईबी) का आयोजन करना चाहते हैं, जिनमें 20 हजार से अधिक भाग लेंगे।

इसमें भूटान, चीन, नेपाल, पाकिस्तान और अमेरिका जैसे देशों के 500 से अधिक बच्चों के भाग लेने की संभावना है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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  • कोहिनूर मुद्दा : 'एसजीपीसी सर्वोच्च न्यायालय में प्रतिवाद दाखिल करे'

    चंडीगढ़, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने बुधवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को सर्वोच्च न्यायालय में एक प्रतिवाद दाखिल करने को कहा। ऐसा इसलिए कि भारत को कोहिनूर हीरा लौटाने पर फैसला देने के पहले सर्वोच्च अदालत कमेटी की बात भी सुन पाए।

    पंजाब के उपमुख्यमंत्री बादल के मीडिया सलाहकार जगवीर सिंह ने कहा, "एसजीपीसी जनहित याचिका में सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व करेगी और उस हीरे को इस धार्मिक संस्था को लौटाने की मांग करेगी जो अभी ब्रिटेन की महारानी के मुकुट में है।"

    उन्होंने कहा, "यह दावा इस आधार पर किया जाएगा कि महाराजा रणजीत सिंह खालसा राज के प्रमुख थे। इस तरह की किसी प्रणाली के अभाव में एसजीपीसी ही सिख समुदाय की प्रतिनिधि है जिसका वास्तव में वह हीरा है।"

    एसजीपीसी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने मंगलवार को कोहिनूर को सिख समुदाय को लौटाने की मांग की थी क्योंकि 19वीं शताब्दी में यह सिख साम्राज्य का हिस्सा था।

    इस मुद्दे पर एक और फैसले में सत्तारूढ़ अकाली दल ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात के लिए पार्टी नेताओं की जिम्मेदारी तय की है ताकि वे सिख समुदाय की ओर से उन्हें एक प्रतिवेदन दे सकें। साथ ही केंद्रीय संस्कृति मंत्री की ओर से इसी हफ्ते अदालत में दिए गए गलत बयान को समझा सकें।

    पार्टी के बयान में कहा गया है कि अकाली दल का प्रनिनिधिमंडल सुषमा स्वराज को यह समझाएगा कि पंजाब के आखिरी शासक महाराजा दिलीप सिंह से कोहिनूर लूटा गया था।

    पार्टी ने कहा है कि किसी भी तरह से इसे मुआवजा या उपहार देना नहीं माना जा सकता है।

    यह भी कहा गया है कि पार्टी को इसका पूरा विश्वास है कि केंद्र इस पर पुनर्विचार करेगा।

    बयान में कहा गया है, "हमारा मानना है कि कोहिनूर को लौटा कर जो गलत हुआ है उसे सही किया जा सकता है।"

    सिखों और अंग्रेजों के युद्ध के बाद जब ब्रिटेन ने सिख शासन वाले अविभाजित पंजाब पर कब्जा कर लिया था तब महारानी विक्टोरिया को 108 कैरेट का कोहिनूर हीरा उपहार स्वरूप दिया गया था।

    टावर ऑफ लंदन में कड़ी सुरक्षा के बीच कोहिनूर को रखा गया है। इस हीरे पर भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान दावा करते हैं।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
  • मोदी ने आडवाणी से मुलाकात की

    नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी से उनके आवास पर मुलाकात की और लगभग आधा घंटा उनके साथ बिताया।

    आडवाणी के करीबी एक सूत्र ने कहा कि मोदी वहां 25 मिनट से अधिक समय तक रहे।

    सूत्र ने कहा, "यह एक सद्भावना मुलाकात थी, क्योंकि मोदी 17 अप्रैल को कमला आडवाणी की श्रद्धांजलि सभा में शामिल नहीं हो पाए थे।"

    लालकृष्ण आडवाणी की पत्नी कमला आडवाणी का छह अप्रैल को निधन हो गया था। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और वेंकैया नायडू 17 अप्रैल को दिल्ली में हुई श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित हुए थे।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
  • विपक्ष की आय के अज्ञात स्रोतों की जांच हो : ममता
    कोलकाता, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्षी दलों की संपत्तियों की जांच कराने की बुधवार को मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, भाजपा और माकपा की आय का बड़ा हिस्सा अज्ञात स्रोतों से है।

    बनर्जी ने उत्तर 24 परगना जिले के दम दम में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, "कांग्रेस की 82.5 प्रतिशत आय का स्रोत, भाजपा की 73 प्रतिशत आय का स्रोत और माकपा की 53 प्रतिशत आय का स्रोत अज्ञात है। इसकी जांच की जानी चाहिए। ये धनराशि कहां से आ रही है।"

    तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता ने झूठ के अनवरत अभियान के लिए विपक्ष पर हमला किया और माकपा व कांग्रेस के बेमेल गठजोड़ का मजाक उड़ाया।

    बनर्जी ने मंगलवार को भी हावड़ा जिले के जगतबल्लभपुर में आय के अज्ञात स्रोतों के बारे में बात की थी, और कहा था कि विपक्ष को तृणमूल पर उंगली उठाने का साहस नहीं करना चाहिए।

    ममता ने कहा कि विपक्ष का एकमात्र एजेंडा उन्हें गाली देना और बंगाल का अपमान करने का है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
  • जमाखोरों पर रखें कड़ी नजर : मोदी
    नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि अधिकारियों को जमाखोरों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए ताकि जिस प्रकार से 2015 में दाल की कमी हुई थी, वह दोबारा न हो।

    यहां मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मोदी ने राज्य सरकारों को निर्देश भी दिया कि वे जमाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

    जानकार सूत्रों के मुताबिक बैठक में दालों और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और कीमत का मुद्दा प्रमुखता से उठा।

    मोदी ने खाद्य मंत्रालय को निर्देश दिया कि राज्यों द्वारा दालों की सरकारी खरीद में आने वाली समस्याओं को दूर करने का उपाय किया जाए ताकि जैसा पिछले साल हुआ था, इस बार न हो।

    पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया, "हम दालों की कीमतों की निगरानी कर रहे हैं। राज्य सरकारों को जमाखोरों के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए कहा गया है।"

    पिछले साल दाल की कीमत में काफी तेजी देखी गई थी। केंद्र सरकार को आननफानन में 5,000 टन दालों का आयात करना पड़ा था।

    कृषि मंत्रालय के साल 2015-16 में 1.73 करोड़ टन दालों के उत्पादन का अनुमान लगाया है जो कि पिछले साल के 1.71 करोड़ टन उत्पादन से थोड़ा ज्यादा है। यह मांग की तुलना में कम है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
  • मथुरा-वृंदावन में आधुनिक रेल बस सेवा फिर शुरू हो : अखिलेश
    लखनऊ, 20 अप्रैल (आईएएनएस/आईपीएन)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मथुरा-वृंदावन में पर्यटक सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने एवं ट्रैफिक की समस्या से निजात के लिए, रेल मंत्री सुरेश प्रभु से आधुनिक रेल बस सेवा को प्राथमिकता पर पुन: शुरू कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने मथुरा में रेलवे की खाली पड़ी भूमि व स्टेशन को मथुरा-वृन्दावन के धार्मिक एवं पौराणिक स्वरूप के अनुरूप विकसित करने का भी अनुरोध किया है।

    इस सम्बन्ध में रेल मंत्री को लिखे अपने एक पत्र में मुख्यमंत्री ने अवगत कराया है कि मथुरा-वृन्दावन के बीच पिछले कई वर्षो से रेल बस सेवा प्रचलित थी, लेकिन वर्तमान में रेलवे ट्रैक सही न होने एवं रेल बस इंजन में खराबी के फलस्वरूप इस सेवा को बंद कर दिया गया है। इससे इस क्षेत्र की पर्यटन एवं नागरिक सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने मथुरा-वृन्दावन के महत्व का जिक्र करते हुए कहा है कि यह क्षेत्र तीर्थ स्थल होने के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। यहां पूरे विश्व से बड़ी संख्या में पर्यटकों का वर्ष भर आना-जाना बना रहता है। मथुरा व वृन्दावन के अधिकांश पर्यटक स्थल एवं पौराणिक मंदिर जैसे श्रीकृष्ण जन्म स्थान, द्वारिकाधीश मंदिर एवं बांके बिहारी मंदिर आदि संकरे मार्गो पर स्थित हैं। पूर्व में संचालित रेल बस सेवा इनमें से अधिकांश स्थलों को जोड़ने का कार्य करती थी, जिसके फलस्वरूप इस क्षेत्र में ट्रैफिक की समस्या से निपटने में भी मदद मिलती थी।

    मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि हेरिटेज सिटी की दृष्टि से इस क्षेत्र में रेल बस सेवा का संचालन बहुत जरूरी है। पर्यटक तथा इस क्षेत्र के निवासी भी लगातार रेल बस सेवा पुन: शुरू किए जाने की मांग कर रहे हैं। इस क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों एवं जनता को बेहतर एवं सुगम यातायात उपलब्ध कराने हेतु मथुरा-वृन्दावन रेल-बस सेवा को प्राथमिकता के आधार पर पुन: संचालित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया है कि क्षेत्र के महत्व को देखते हुए रेल मंत्रालय इस मामले में तत्काल निर्णय लेते हुए पूर्व में संचालित रेल-बस सेवा को और अधिक बेहतर ढंग से शुरू करेगा।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
  • उप्र : डीजीपी ऑफिस ने अमिताभ को 9 किलो अभिलेख सौंपे
    लखनऊ, 20 अप्रैल (आईएएनएस/आईपीएन)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के आदेश के क्रम में डीजीपी ऑफिस ने बुधवार को आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को उनके विभागीय कार्यवाही से जुड़े नौ किलो अभिलेख प्रदान किए।

    उच्च न्यायालय ने 13 जनवरी 2016 को प्रदेश सरकार को चार सप्ताह में अभिलेख देने को कहा था पर उसने इसका पालन करने की जगह सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर किया जो 14 मार्च को पहली सुनवाई के दिन ही खारिज हो गया। इसके बाद अमिताभ ने अवमानना याचिका दायर किया जिसमें न्यायालय ने प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पांडा को नोटिस जारी किया।

    इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अमिताभ को अभिलेख देने का निर्णय किया और आज डीजीपी ऑफिस ने उनके निवास पर ये अभिलेख पहुंचाये हैं, यद्यपि गृह विभाग के अभिलेख अभी उन्हें नहीं दिए गए हैं। अमिताभ के खिलाफ उच्च न्यायालय के आदेश से 13 जनवरी से जांच रुकी हुई है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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