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ज्यादा कसरत करना दिल के लिए घातक!

टोरंटो, 25 फरवरी (आईएएनएस)। जैसा कि अक्सर कई दवाइयों के साथ होता है कि अगर उनकी जरूरत से ज्यादा मात्रा ली जाए तो वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं, ठीक उसी तरह जरूरत से ज्यादा कसरत करना भी हानिकारक हो सकता है। यह जानकारी एक नए अध्ययन से सामने आई है।

शोधकर्ताओं ने उन अध्ययनों की समीक्षा की जो कसरत और हृदय संबंधी परेशानियों के संबंध में किए गए हैं और पाया कि इसके पुख्ता सबूत हैं कि खूब सारा कसरत करने से कार्डियो संबंधी और हृदय संबंधी स्थायी परेशानियां पैदा हो जाती हैं।

शोधकर्ता ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के बेकर आईडीआई हार्ट एंड डायबिटिक इंस्टीट्यूट रे आंद्रे ला गेरचे का कहना है, "ज्यादा कसरत करने से हृदय संबधी परेशानियां होती हैं, इसे मीडिया में कसरत को बढ़ावा देने और उसके फायदे बताने वालों परिचर्चा और आलेखों में छुप गई है।"

उन्होंने कहा कि माहौल यहां तक बना दिया गया है कि अगर कोई इस संबंध में बात करने की कोशिश करता है तो उसकी आलोचना होने लगती है। इस अध्ययन में हमने अत्यधिक कसरत से होने वाले खतरों को पहचानने में जानकारी मिली है।

यह शोध कनाडियन जर्नल ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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  • अब हृदय रोग की पहचान 'दी हार्ट एप' से करें
    नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। मैक्स हार्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राजीव राठी ने एक ऐसा एप बनाया है जिससे लोग घर बैठे अपने फोन पर पता लगा सकते हैं कि उन्हें हृदय की बीमारी के लक्षण तो नहीं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार 2020 तक एक तिहाई मौत हृदय रोग के कारण होगी। अगर लक्षणों की पहचान कर सही समय पर इस बीमारी का इलाज शुरू कर दिया जाए तो अधिकतर मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

    ऐसा देखा गया है कि अक्सर मरीज हृदयघात के लक्षणों को समझ नहीं पाते। जब वे डॉक्टर के पास पहुंचते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। यह तक कि हृदय कि मांसपेशियां हमेशा के लिए मृत हो जाती हैं।

    गूगल प्ले स्टोर से 'दी हार्ट एप' को डाउनलोड कर बड़ी आसानी से हृदय रोग के लक्षणों को पहचाना जा सकता है। यह एप मुफ्त में उपलब्ध है। एप निर्माता डॉक्टर राठी कहते हैं "मुझे उम्मीद है कि अधिक से अधिक लोग इस मुफ्त सेवा का उपयोग करेंगे और अपने परिवार व मित्रों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे, ताकि देश में हृदय की बीमारियों से होने वाली मृत्यु दर को कम किया जा सके।"

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
  • महिलाओं को अधिक झेलना पड़ना है 'गर्दन का दर्द'
    न्यूयार्क, 9 मार्च (आईएएनएस)। महिलाओं और पुरुषों में दर्द के अलग-अलग अनुभवों पर प्रकाश डालते हुए अमेरिका के शोधार्थियों ने पता लगाया है कि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में गर्दन दर्द का अधिक सामना करना पड़ता है। एक नए शोध में इसकी पुष्टि हुई है।

    यह दर्द सर्वाइकल डिजेनरेटिव डिस्क रोग के कारण होता है और पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह समस्या 1.38 फीसदी अधिक होने की संभावना होती है।

    सर्वाइकल डिजेनरेटिव डिस्क रोग गर्दन के दर्द का एक आम कारण है। इसमें गर्दन में कठोरता, खिंचाव, जलन, झुनझुनी और स्तब्धता का अनुभव होता है। सिर और गर्दन को हिलाने-डुलाने पर काफी तेज दर्द महसूस होता है।

    इस शोध में लोयोला यूनिवर्सिटी शिकागो स्ट्रिच स्कूल ऑफ मेडिसिन के भारतीय मूल के शोधार्थी राघवेंद्र और जोसेफ होल्टमैन ने 3,337 रोगियों का अध्ययन किया, जो दर्द का इलाज करा रहे थे।

    शोधार्थियों ने बताया कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में दर्द का फैलाव थोड़ा अधिक पाया गया, हालांकि यह अंतर सांख्यिकी रूप से महत्वपूर्ण नहीं था।

    यह शोध 'अमेरिकन एकेडमी ऑफ पेन मेडिसिन इन पाल्म स्प्रिंग्स' की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किया गया है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
  • दिल्ली में एम्स विनिर्माण स्थल पर जमीन धंसने से 2 की मौत
    नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। यहां एम्स परिसर के पास चल रहे निर्माण कार्य के दौरान जमीन धंसने से बुधवार को दो मजदूरों की मौत हो गई जबकि चार गंभीर रूप से घायल हो गए।

    अग्निशमन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की विस्तार योजना, नई इमारतों के निर्माण के तहत खुदाई का काम चल रहा था, तभी जमीन धंसने से छह मजदूर फंस गए।

    अग्निशमन विभाग के अधिकारी ने बताया, "हादसा अपराह्न 12.15 के आसपास हुआ। इसके पास हाल ही में एम्स प्रसूति और बच्चे के वार्ड का निर्माण किया गया था। दो मजदूर अंदर धंस गए। चार की हालत गंभीर बनी हुई है। सभी को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।"

    अग्निशमन विभाग ने बताया कि बचाव कार्यकर्ताओं की तीन टीम तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना की गईं और बचाव और खोज अभियान शाम 6 बजे तक जारी रहा।

    एक अधिकारी ने बताया, "अभियान लगभग पूरा हो गया, लेकिन हमारे कर्मचारी अभी भी घटनास्थल पर हैं। हमने छह लोगों को बाहर निकाला, जिनमें दो मृत पाए गए।"

    पीड़ित को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने पहले मरीज को मृत घोषित कर दिया, जबकि दूसरे की गंभीर स्थिति के कारण मौत हो गई।

    सफदरजंग अस्पताल की प्रवक्ता पूनम ढांडा ने कहा, "दो मजदूरों की मौत हो गई और अन्य मजदूरों का इलाज चल रहा है।"

    संस्थान के प्रवक्ता अमित गुप्ता ने आईएएनएस को बताया, "निर्माण कार्य एक निजी निर्माण कंपनी द्वारा किया जा रहा था। घायलों को एम्स लाया गया है हमारे ट्रॉमा सेंटर में उनके लिए सब तैयारी है।"

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
  • जीका वायरस से लकवा का पहला मामला सामने आया

    लंदन, 9 मार्च (आईएएनएस)। पहली बार जीका से संक्रमित एक 15 साल की लड़की के लकवे का शिकार होने का मामला सामने आया है। फ्रांस के शोधकर्ताओं ने यह खुलासा किया है।

    शोधकर्ताओं ने कहा, "यह मामला जीका वायरस के न्यूरोट्रॉफिक प्रकृति के अनुमान की पुष्टि करता है। यह जीका संक्रमण के कारण तंत्रिका तंत्र के प्रभावित होने पर प्रकाश डालता है।"

    शोध में कहा गया है, "हालांकि यह सिर्फ इकलौता मामला है, इसलिए भविष्य में भी शोध जारी रखने की जरूरत है।"

    यह मामला प्वायंट-ए-पित्रे विश्वविद्यालय अस्पताल में जीका संक्रमण की शिकार 15 वर्षीय लड़की में सामने आया है। इस शोध को द लेसेंट में प्रकाशित किया गया है।

    फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च (आईएनएसईआरएम), प्वायंट-ए-विश्वविद्यालय अस्पताल और एंटीलेस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मिलकर यह शोध किया है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
  • किडनी रोग की जांच कराना जरूरी : सर्वेक्षण
    नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। ईमेडीनेक्सेस के एक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत के किडनी रोग विशेषज्ञ (नेफ्रोलॉजिस्टस) ने एकमत होकर देश में किडनी की बीमारी के जांच कार्यक्रम को बड़े स्तर पर चलाने की मांग की है।

    एक्रीडेटेड मेडिकल पेशेवरों के लिए हाल ही में लांच किए गए प्रोफैशनल नेटवर्किं ग और एडवोकेसी प्लेटफार्म, हैल्थकेयर स्टार्ट-अप ईमेडीनेक्सेस ने वल्र्ड किडनी डे के मौके पर 200 नेफ्रोलॉजिस्टस का सर्वेक्षण किया।

    इनमें से शत प्रतिशत डॉक्टरों का कहना था कि भारत में केवल 1000 नेफ्रोलॉजिस्टस हैं जो कि देश की विशाल आबादी को देखते हुए बेहद कम है।

    ईमेडीनेक्सेस के सह संस्थापकों निलेश अग्रवाल और अमित शर्मा ने एक बयान में कहा कि डायलसिस सेवा में मांग और आपूर्ति की कमी को देखते हुए वित्त मंत्री द्वारा किडनी केयर को विकसित करने के लिए की गई घोषणा का हम स्वागत करते हैं।

    उन्होंने कहा कि ईमेडीनेक्सेस देश के सभी डॉक्टरों को किडनी से जुड़े मामले में अपनाई जाने वाली बेहतर प्रक्रियों के बारे में जानकारी पहुंचाना चाहता है और इस दिशा में हम इंडियन सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के साथ स्वास्थय मंत्रालय के साथ मिलकर काम करेंगे।

    डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा कि अगर ब्लड प्रेशर और ब्लड शूगर को नियंत्रित रखा जाए तो 50 प्रतिशत क्रॉनिक किडनी की बीमारी के मामलों को टाला जा सकता है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
  • जिंदगियां बचाने के लिए सब्जियों और फलों के दाम कम करें : आईएमए
    नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। दिल के रोग दुनिया में बीमारियों और कम उम्र में मौत के प्रमुख कारण बने हुए हैं। इनके कारण हर साल 1.75 करोड़ लोगों की जान चली जाती है। भारत जैसे विकासशील देशों में इनका गंभीर खतरा है क्योंकि यहां न केवल घनी आबादी है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और क्षेत्रीय विभिन्नता में भी अत्यधिक फर्क है।

    भारत डायबिटीज के मामले में पहले ही दुनिया की राजधानी माना जा चुका है। अनुमान के अनुसार वर्ष 2025 तक हम अनुमानित 6.98 करोड़ रोगियों के साथ दिल के रोगों के मामले में भी दुनिया की राजधानी बन जाएंगे।

    दिल के रोगों में सबसे आम रक्त धमनियों का रोग है, जो दिल की रक्त धमनियों की दीवारों पर प्लॉक जमने से उनके सिकुड़ने और बंद होने की वजह से होता है। इस समस्या का प्रमुख कारण अस्वस्थ जीवनशैली और खानपान है। दिल के दौरे के लिए जिम्मेदार कारणों डायबिटीज, हाइपरटेंशन, डिस्लिपिडीमिया और मोटापे पर सेहतमंद आहार के प्रभाव को देखते हुए आईएमए ने सेहतमंद खानपान को उत्साहित करने के लिए एक कर नीति की सलाह दी है।

    इंडियन मेडिकल एसोशिएशन (आईएमए) के मानद महासचिव डॉ के.के. अग्रवाल ने बताया कि आईएमए का मानना है कि फलों और सब्जियों को सब्सिडी देकर दाम कम करने से और जंक फूड, मीठे पेय पदार्थ, शराब और तंबाकू पर कर बढ़ाने से दिल के रोगों और स्ट्रोक से जाने वाली हजारों जानें बचाई जा सकती हैं।

    उन्होंने कहा कि हम सरकार से अपील करते हैं कि अगर संभव हो सके तो यह किया जाए। इस तरह हम देश पर बढ़ते बीमारियों के बोझ को कम कर सकते हैं।

    अध्ययन में यह बात सामने आई है कि तम्बाकू उत्पादों की कीमत बढ़ने से अमेरिकी लोगों में धूम्रपान करने वालों की संख्या कम हुई है।

    अमेरीकन हार्ट एसोसिएशन की फीनिक्स में हुई एक बैठक के दौरान प्रस्तुत किए गए एक शोध के मुताबिक फलों और सब्जियों के दाम में 30 प्रतिशत की कमी से दिल के दौरे और स्ट्रोक्स से होने वाली अमेरिकी नागरिकों की मौतों में अगले 15 साल में तीन प्रतिशत तक कमी आएगी। इससे लगभग 2,00,000 जानें बच जाएंगी।

    दामों में थोड़ी सी कमी को अगर जंक फूड के बढ़े हुए दामों की तुलना में रख कर देखें तो इसका काफी फायदा हो सकता है। उनका अनुमान है कि अगर फलों, सब्जियों व अनाज के दामों में 10 प्रतिशत की कमी करें और मीठे पेय की कीमत उतनी ही बढ़ा दें, तो अगले 20 सालों में दिल के रोगों और स्ट्रोक से 5,15,000 कम मौतें होंगी।

    मीठे पेयों पर कीमतों में बदलाव स्थानीय, प्रादेशिक या केंद्रीय एक्साईज करों के जरिए किए जा सकते हैं, जबकि फलों और सब्जियों पर सरकार सब्सिडी दे सकती है। इस तरह बजट के संतुलन पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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