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Wednesday, 01 June 2016 22:40

नाभिकीय व नवीकरणीय ऊर्जा के बीच तुलना की जरूरत नहीं : रोसेटम प्रमुख

अंजलि ओझा
मॉस्को, 1 जून (आईएएनएस)। रूस के परमाणु ऊर्जा निगम रोसेटम के प्रमुख सर्गेई किरियेंको ने कहा है कि नाभिकीय ऊर्जा तथा नवीकरणीय ऊर्जा के बीच तुलना करने की कोई जरूरत नहीं है।

भारतीय पत्रकारों के एक चयनित समूह से यहां किरियेंको ने जोर देते हुए कहा कि कार्बन मुक्त अर्थव्यवस्था पाने के लिए नवीकरणीय व नाभिकीय ऊर्जा को मिश्रित करने की जरूरत है।

रूस के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके किरियेंको ने कहा, "हमें नवीकरणीय ऊर्जा और नाभिकीय ऊर्जा के बीच तुलना करने की कोई जरूरत नहीं है। अगर ऊर्जा के एक ही स्रोत पर निर्भर रहा जाए, तो इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।"

उन्होंने कहा, "उद्योगों के लिए बेहद अधिक ऊर्जा आपूर्ति की जरूरत है। हमें ऊर्जा की कुछ बुनियादी जरूरतें भी हैं। ये बुनियादी जरूरतें ऊर्जा नाभिकीय ऊर्जा से सुनिश्चित की जा सकेंगी।"

उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा पूरक हो सकता है।

किरियेंको ने कहा, "सऊदी अरब, ब्राजील, मिस्र तथा जॉर्डन जैसे देश, जिनके पास सूरज की रोशनी (सौर ऊर्जा के उत्पादन के लिए) की कमी नहीं है, वैसे देश भी नाभिकीय ऊर्जा की ओर रुख कर रहे हैं।"

--आईएएनएस
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Wednesday, 01 June 2016 22:20

कैलाश यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते से बचने को कहा

काठमांडू, 1 जून (आईएएनएस)। नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को भारतीय नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की। इसमें कहा गया है कि जो श्रद्धालु कैलाश-मानसरोवर की यात्रा नेपाल के रास्ते करना चाहते हैं, वे इससे परहेज करें क्योंकि मौसम के बहुत खराब रहने की भविष्यवाणी की गई है।

दूतावास ने एक बयान में कहा, "चूंकि आने वाले हफ्तों में मौसम की स्थिति और खराब होने वाली है, इसलिए भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे कैलाश पर्वत और पवित्र मानसरोवर झील तक जाने के लिए नेपालगंज-सिमिकोट-हिलसा मार्ग से परहेज करें।"

नेपालगंज-सिमिकोट-हिलसा मार्ग को कठिन माना जाता है, लेकिन बहुत सारे भारतीय चीन की सीमा के करीब इसी खतरनाक मार्ग को प्राथमिकता देते हैं।

बड़ी संख्या में भारतीय नेपालगंज-सिमिकोट-हिलसा मार्ग से होकर कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए अपने स्तर से व्यवस्था करते हैं।

दूतावास ने कहा कि खराब मौसम की वजह से काफी लोग हिलसा और सिमिकोट में ठहरने और खाने की समस्या का सामना करते हैं।

मौसम बहुत खराब रहने की वजह से हिलसा से सिमिकोट हेलीकॉप्टर से और सिमिकोट से नेपालगंज विमान से लोगों को निकालकर ले जाना संभव नहीं हो पाता।

केवल इसी हफ्ते 500 से अधिक भारतीय हिलसा और सिमिकोट में फंस गए थे और अधिकारियों को उन्हें वहां से निकालने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

इन सभी तीर्थ यात्रियों को निजी भारतीय टूर आपरेटर लाए थे और उन्हीं ने उनकी यात्रा एवं रहने खाने का इंतजाम किया था।

इनमें से अधिकतर को हिलसा-सिमिकोट इलाके से नेपाली सुरक्षा अधिकारियों की मदद से हवाई मार्ग से निकाला गया।

भारतीय दूतावास ने कहा है कि नेपाल सरकार और यात्रा संचालकों की सहायता से तीर्थयात्रियों को हिलसा से सिमिकोट और सिमिकोट से नेपालगंज से समय से बाहर निकालने की हर संभव व्यवस्था की जा रही है।

हालांकि, खराब मौसम नियमित हवाई सेवा में बाधा डाल रहा है, इस वजह से हिलसा और सिमिकोट में जो लोग फंसे हैं उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

हर साल कैलाश-मानसरोवर यात्रा जून से सितंबर तक होती है।

भारतीय विदेश मंत्रालय तीर्थयात्रियों को दो मार्गो से कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर भेजता है। ये हैं उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होकर जो 25 दिन की यात्रा है और सिक्किम के नाथु ला से होकर जो यात्रा 23 दिन में पूरी होती है।

--आईएएनएस
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Wednesday, 01 June 2016 19:50

डब्ल्यूटीओ में न्याय को कमजोर करने का अमेरिका पर आरोप

जेनेवा, 1 जून (आईएएनएस)। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के वर्तमान न्यायाधीश को दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त करने पर अमेरिका की आपत्ति से इस संगठन की स्वतंत्रता एवं प्रभावकता कमजोर होगी। बुधवार को मीडिया रपट में यह बात कही गई है।

अमेरिका ने पिछले हफ्ते डब्ल्यूटीओ के अन्य सदस्य देशों को बताया कि वह न्यायाधीश सेउंग वा चांग को डब्ल्यूटीओ की अपीली संस्था में दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त करने का समर्थन नहीं करेगा। चांग दक्षिण कोरिया के हैं, डब्ल्यूटीओ के न्यायाधीश के रूप में उनके चार साल का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। यह संस्था डब्ल्यूटीओ के सदस्यों के विवाद सामने आने पर समितियों की रपट पर अपील की सुनवाई करती है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, डब्ल्यूटीओ का 20 साल पहले जब गठन हुआ था, उसी समय से वर्तमान सदस्य को सेवा का दूसरा चार साल का कार्यकाल देने की परंपरा रही है। पिछले साल अमेरिका और भारत के वर्तमान सदस्यों को दूसरा कार्यकाल दिया गया था।

मीडिया रपट में कहा गया है कि अमेरिका ने चांग का विरोध उनकी न्यायिक क्षमता या स्वतंत्रता की कमी की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए किया है क्योंकि उन्होंने अमेरिका के खिलाफ एक फैसले में हिस्सा लिया था।

हटने वाले कोरियाई सदस्य पर आरोप है कि वह शुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता यानी जनरल एग्रीमेंट ऑन टेरिफ एंड ट्रेड (जीएटी)/डब्ल्यूटीओ करारों से तीन मामलों में विचलित हुए।

अपीली संस्था के छह सदस्यों ने कहा, "खास मामलों से किसी सदस्य के दोबारा नियुक्ति को जोड़ने से भरोसे पर प्रभाव पड़ सकता है। चांग ने रपटों की गुणवत्ता बनाए रखने एवं हमारी रचनात्मक बेहतरी की सहायता करने के लिए हमलोगों के साथ में कड़ी मेहनत की है। सदस्यों ने चांग की निष्पक्षता, ईमानदारी एवं स्वतंत्रता की सराहना की है।"

कैलिफोर्निया इर्विन विश्वविद्यालय के एक विधि विशेषज्ञ ग्रेगरी शेफर ने कहा कि अमेरिका ने सक्रियता के साथ दूसरों पर नियम लागू कराने के लिए डब्ल्यूटीओ विवाद निपटारा व्यवस्था का इस्तेमाल किया है, लेकिन यदि देश इस व्यवस्था की साख को नष्ट कर देगा तब यह अविश्वसनीय हो जाएगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि यह एक ऐसे प्रशासन के लिए एक बहुत जोखिम वाली रणनीति है, जो दावे के साथ खुद को अंतर्राष्ट्रीयतावादी कहता है।

उन्होंने कहा, "एक वैश्विक तंत्र बनाने का असली कारण एक तीसरे पक्ष वाली संस्था बनाना है, जो ऐसे विवादों को जो अंतत: अंतर्राष्ट्रीय कल्याण, शांति और सुरक्षा को खतरे में डाले, उन्हें सुलझाने में मदद करे।"

--आईएएनएस
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Wednesday, 01 June 2016 19:20

'विदेशियों के लिए बंदीगृह बनाने जमीन तलाश रही गोवा सरकार'

पणजी, 1 जून (आईएएनएस)। निर्वासन के लिए इंतजार कर रहे विदेशी नागरिकों के लिए एक अलग बंदीगृह बनाने हेतु गोवा सरकार जमीन चिन्हित करने में लगी हुई है।

मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने बुधवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि निर्वासित होने वाले विदेशियों के लिए बंदीगृह बनाने हेतु जमीन की तलाश जारी है।

विदित हो कि इससे पहले नाइजीरियाई नागरिकों के बारे में पारसेकर ने टिप्पणी की थी, जिससे एक विवाद खड़ा हो गया है।

भारतीय कानून के तहत जब तक कानूनी मामले का फैसला नहीं हो जाता है, तब तक किसी विदेशी नागरिक को निर्वासित नहीं किया जा सकता है।

गोवा के पर्यटन मंत्री दिलीप पारुलेकर ने सोमवार को कहा था कि नाइजीरियाई नागरिक कानून का लाभ उठाकर पहले आपराधिक मामलों में उलझते हैं और भारत में अपना प्रवास बढ़ा लेते हैं।

अलग बंदीगृह से राज्य के अधिकारी निर्वासित होने वालों को रखने में सक्षम हो जाएंगे और निर्वासन की प्रक्रिया पूरी होने तक उन पर नियंत्रण रखना भी सुनिश्चित हो जाएगा।

अलग बंदीगृह की प्रक्रिया गोवा सरकार ने कुछ साल पहले शुरू की थी। स्थानीय ड्रग माफिया द्वारा अपने एक साथी की हत्या के विरोध में नाइजीरियाई नागरिकों की भीड़ ने गोवा में राष्ट्रीय राज मार्ग संख्या 17 पर जाम लगा दिया था।

इस घटना के बाद गोवा सरकार हरकत में आई थी और अलग बंदीगृह बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी।

जाम के दौरान हुई झड़प में कई पुलिसकर्मी, स्थानीय लोग और नाइजीरियाई नागरिक भी घायल हुए थे।

केवल 2012 में फर्जी वीजा के आधार पर भारत में अपना प्रवास बढ़ाने वाले अफ्रीकी देशों -सुडान, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका- के करीब 40 लोग उत्तरी गोवा जिले में गिरफ्तार किए गए थे।

पारसेकर ने सोमवार को कहा था कि गोवावासी नाइजीरियाई लोगों के व्यववहार, जीवनशैली और मनोवृत्ति से बेहद नाराज हैं और इनके बारे में उन्हें अनेक शिकायतें मिली हैं।

--आईएएनएस
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Wednesday, 01 June 2016 18:30

चीन के राष्ट्रपति उत्तर कोरिया के प्रतिनिधिमंडल से मिले

बीजिंग, 1 जून (आईएएनएस/सिन्हुआ)। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुधवार को उत्तर कोरिया की वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया (डब्ल्यूपीके) के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।

प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख री सू-योंग ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन का संदेश शी जिनपिंग तक पहुंचाया।

किम ने अपने संदेश में कहा कि चीन द्विपक्षीय पारंपरिक मित्रता को विकसित व मजबूत करने तथा कोरियाई प्रायद्वीप व पूर्वोत्तर एशिया में शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिए उत्तर कोरिया के साथ मिलकर काम करना चाहता है।

री ने शी को मई की शुरुआत में आयोजित डब्ल्यूपीके के सातवें अधिवेशन से अवगत कराया, जिसमें किम को डब्ल्यूपीके का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।

शी ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि यह दौरा कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच रणनीतिक संचार की परंपरा का सबूत है।

शी ने जोर देते हुए कहा कि उत्तर कोरिया के साथ मित्रवत सहयोगात्मक संबंधों का चीन बेहद सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को विकसित, मजबूत व बरकरार रखने के लिए उनका देश प्योंगयांग के साथ काम करने के लिए इच्छुक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप मुद्दे पर चीन का रुख संगत व स्पष्ट है। उन्होंने संबंधित पक्षों से क्षेत्रीय शांति व स्थिरता की सुरक्षा के लिए शांति व संयम बरतने तथा बातचीत को बढ़ाने का आह्वान किया।

री डब्ल्यूपीके सेंट्रल कमेटी के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य, कमेटी के उपाध्यक्ष तथा पार्टी के अंतर्राष्ट्रीय विभाग के निदेशक हैं।

--आईएएनएस
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Wednesday, 01 June 2016 18:20

अफगानिस्तान ने पेशावर में वाणिज्य दूतावास को बंद किया

इस्लामाबाद, 1 जून (आईएएनएस)। अफगानिस्तान ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा अपने कर्मचारियों के उत्पीड़न के विरोध में पेशावर में अपने वाणिज्य दूतावास को बंद कर दिया है।

पाझवोक अफगान न्यूज से वाणिज्य दूतावास के एक सूत्र ने कहा, "वाणिज्य दूतावास अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगा। हम मेजबान देश से इस बात का ठोस आश्वासन चाहते हैं कि भविष्य में अफगान राजनयिकों का उत्पीड़न नहीं होगा।"

पेशावर के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने दावा किया कि राजनयिक के वाहन ने विशिष्ट राजनयिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया और इसी कारण से उनकी कार सुरक्षा जांच के लिए रोकी गई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कार में बैठे महावाणिज्य दूत का उत्पीड़न करने का कोई इरादा नहीं था।

इस बीच, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता नफीस जकरिया ने कहा कि वे घटना से अवगत हैं और संबंधित पक्षों से प्रासंगिक सूचना मिलने के बाद मंत्रालय एक आधिकारिक बयान जारी करेगा।

दोनों देशों के बीच हाल के महीनों में तोरखाम सीमा को बंद करने सहित कड़वाहट भरी कई घटनाएं सामने आई हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ तथा अफगानिस्तान के राजदूत उमर जखीलवाल के बीच बातचीत के बाद सीमा को खोल दिया गया।

31 मई को पाकिस्तानी अधिकारियों ने अफगानिस्तान के नागरिकों को बिना वीजा या वैध यात्रा दस्तावेज के पाकिस्तान में दाखिल होने से मना कर दिया था। सीमा अधिकारियों ने कहा था कि तोरखाम सीमा पर राहत के लिए अफगानिस्तान ने जो अनुरोध पत्र दिया है, उस पर अभी तक विचार नहीं किया गया है।

उन्होंने अफगान नागरिकों को इस बात की सूचना दी कि बिना वीजा तथा अन्य वैध यात्रा दस्तावेजों के पाकिस्तान में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा। जो लोग अवैध तरीके से पाकिस्तान में दाखिल होने की कोशिश करेंगे, उन्हें हिरासत में लेकर उन पर मुकदमा चलाया जाएगा।

--आईएएनएस
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Wednesday, 01 June 2016 18:00

'पाकिस्तान को अफगानिस्तान के साथ संबंध मजबूत करना चाहिए'

काबुल, 1 जून (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा है कि पाकिस्तान को दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते को बढ़ावा देने के लिए हिंसा की जगह दोस्ती एवं भाईचारे का चुनाव करना चाहिए।

करजई ने यह टिप्पणी पाकिस्तानी पत्रकारों के एक दल से मुलाकात के बाद की। यह दल 'इक्वल एक्सेस' कार्यक्रम के तहत अफगानिस्तान आया था।

पूर्व राष्ट्रपति ने पाकिस्तान को अपने यहां शरण लेने के लिए मजबूर अफगानिस्तान के लोगों का समर्थन करने के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही उन्होंने दोनों देशों की सरकारों के बीच विश्वास बहाली पर बल दिया जो अच्छा संबंध बनाने की कुंजी है।

करजई की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अफगानिस्तान के अधिकारी लंबे समय से सरकार विरोधी गुटों का समर्थन करने को लेकर पाकिस्तान की आलोचना कर रहे हैं। इन गुटों में अफगानिस्तान में लड़ रहा तालिबान भी शामिल है।

अफगानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान तालिबान और हक्कानी के आतंकियों के नेटवर्क सहित आतंकी गुटों को अपनी धरती को सुरक्षित पनाहगाह के रूप में इस्तेमाल करने की इजाजत देता है। वहीं से वे अफगानिस्तान में हमलों की साजिश रचते हैं।

--आईएएनएस
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Wednesday, 01 June 2016 17:40

दोनेत्स्क, लुगांस्क को मान्यता देना नुकसानदायक होगा : लावरोव

मॉस्को, 1 जून (आईएएनएस/सिन्हुआ)। रूस के विदेशमंत्री सर्गेई लावरोव ने मंगलवार को कहा कि यूक्रेन के स्वघोषित दोनेत्स्क और लुगांस्क गणराज्यों को मान्यता देने का कोई भी कदम नुकसानदायक होगा।

इस तरह के प्रयास पूर्वी यूक्रेन में एक शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने के उद्देश्य वाले मिंस्क समझौतों के कार्यान्वयन में मदद नहीं कर पाएंगे।

लावरोव ने रूस के दैनिक समाचार पत्र 'कोमोसोमोलिकाया प्रवादा' के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "यह पश्चिमी देशों के लिए यूक्रेन पर अपने दबाव को रोकने के लिए बेहतरीन उदाहरण है।"

उन्होंने जोर देकर कहा कि विद्रोहियों के अधीन क्षेत्रों से हटने की रूस की कोई योजना नहीं है, और वह न केवल उन्हें राजनीतिक समर्थन देने जा रहा है, बल्कि उन्हें आर्थिक समर्थन और मानवीय कार्यो के माध्यम से भी उनकी मदद करने जा रहा है।

लावरोव के अनुसार, "पश्चिमी देश कीव पर दबाव बना रहे हैं कि वह मिंस्क समझौते का पालन करे, हालांकि उन्होंने ऐसा सार्वजनिक तौर पर नहीं किया है।"

--आईएएनएस
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Wednesday, 01 June 2016 16:50

'बिना वीजा पाकिस्तान की यात्रा न करें अफगान नागरिक'

काबुल, 1 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान-अफगानिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर दोनों देशों के लोगों की निर्बाध (बिना जांच के) आवाजाही पर पाकिस्तान सख्त रुख अपनाने जा रहा है। वह बुधवार से सख्त सीमा नियंत्रण व्यवस्था लागू कर रहा है।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने 31 मई की समय सीमा खत्म होने के साथ ही अफगान नागरिकों से कहा है कि वे बिना वैध यात्रा दस्तावेज के सीमा के आरपार आवाजाही न करें। तोरखाम सीमा पर खैबर दर्रे के आरपार आवाजाही के लिए रमजान तथा ईद के दिनों में नियमों में ढील देने के अनुरोध पर पाकिस्तान ने अभी तक विचार नहीं किया है।

जियो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खैबर राइफल्स के कर्मचारियों, खासरदारों तथा अन्य सीमा अधिकारियों ने यह घोषणा तोरखाम सीमा पर मंगलवार को लाउडस्पीकर से की।

उन्होंने अफगान नागरिकों को इस बात की सूचना दी कि बिना वीजा तथा अन्य वैध यात्रा दस्तावेजों के पाकिस्तान में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा। जो लोग अवैध तरीके से पाकिस्तान में दाखिल होने की कोशिश करेंगे, उन्हें हिरासत में लेकर उन पर मुकदमा चलाया जाएगा।

अफगान नागरिक इस नई पाबंदी से खुश नहीं हैं। सीमा अधिकारियों ने कहा कि अफगान नागरिकों को पाकिस्तान में घुसने से रोकने पर दोनों पड़ोसी देशों के लोगों की दोनों देशों में आवाजाही कम हो जाएगी, जिससे उनका जुड़ाव कम हो जाएगा।

तोरखाम में अफगान सीमा सुरक्षा बल के प्रभारी कर्नल निसार खान ने कहा कि पाकिस्तान को सीमा पर खासकर रमजान के दिनों में और पेशावर में इलाज कराने वाले लोगों को आवाजाही में ढील देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान ढिलाई नहीं बरतता है, तो सभी प्रकार की आवाजाही के लिए तोरखान सीमा को पूरी तरह बंद करने पर हम मजबूर हो जाएंगे। कर्नल ने कहा कि वे पाकिस्तानी ट्रकों को मध्य एशियाई देशों में जाने की अनुमति नहीं देंगे।

तोरखाम में अफगानी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की कि मुद्दे के समाधान के लिए अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से संपर्क बनाया हुआ है।

सूत्रों ने जियो न्यूज से कहा है कि पाकिस्तानी विदेश कार्यालय को समय सीमा बढ़ाने के लिए अफगानिस्तान का आधिकारिक अनुरोध पत्र मिला है।

--आईएएनएस
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Wednesday, 01 June 2016 16:10

सू की होंगी रोहिंग्या पर गठित समिति की प्रमुख

नेपेडा, 1 जून (आईएएनएस)। नोबेल पुरस्कार विजेता और म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सांग सू की राखिने प्रांत में शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए बनी समिति की अध्यक्ष होंगी। राखिने प्रांत में ही रोहिंग्या मुस्लिम आबादी रहती है, जिन्हें काफी सताया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी बुधवार को दी।

अमेरिका के विदेशमंत्री जॉन केरी ने म्यांमार की विदेशमंत्री आंग सांग सू की से रोहिंग्या अल्पसंख्यक समुदाय की स्थिति को लेकर की गई एक मुलाकात में मानवाधिकार को बढ़ावा देने की गुजारिश की थी, जिसके एक हफ्ते बाद इस समिति का गठन किया गया है।

सरकारी अखबार ग्लोबल न्यू लाईट ऑफ म्यांमार के मुताबिक, इस समिति में म्यांमार की नवनिर्वाचित मंत्रिमंडल के 19 सदस्य होंगे।

म्यांमार में अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमान सदियों से रहते आ रहे हैं, लेकिन उन्हें म्यांमार के निवासी के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है, बल्कि बंगाली आप्रवासी माना जाता है।

समाचार एजेंसी एफे की रपट के मुताबिक, म्यांमार के इस क्षेत्र की बहुसंख्यक बौद्ध आबादी के साथ रोहिंग्या मुसलमानों का टकराव होता रहता है। साल 2012 में भड़के एक सांप्रदायिक दंगे में 160 लोग मारे गए थे। उसके बाद से 1,20,000 रोहिंग्या मुसलमान 67 शिविरों में जीवन गुजार रहे हैं और उन पर कई तरह का प्रतिबंध लगा है।

मार्च में नई सरकार के सत्ता संभालने से कुछ दिन पहले पूर्व सरकार ने राखिने में लागू आपातकाल हटा लिया था, जहां रोहिंग्या मुसलमानों को आंदोलन, शिक्षा आदि की सीमित स्वतंत्रता थी और वे अपनी संपत्ति की जब्ती से पीड़ित थे।

--आईएएनएस
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