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कविता

'दिल्ली पुस्तक मेला' शुरू

नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी स्थित प्रगति मैदान में शनिवार को दिल्ली पुस्तक मेला शुरू हो गया। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने मेले का उद्घाटन किया। सिंह ने कहा...

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छग : वयोवृद्ध साहित्यकार-पत्रकार प्रभाकर चौबे का निधन

रायपुर, 22 जून (आईएएनएस/वीएनएस)। वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार प्रभाकर चौबे का गुरुवार रात यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने चौबे के...

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हिंदू चरमपंथियों को परोक्ष रूप से बढ़ावा दे रही है सरकार : रामानुन्नी

निखिल एम. बाबू नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखक के. पी. रामानुन्नी का कहना है कि भाजपानीत केंद्रीय सरकार अप्रत्यक्ष रूप से हिंदू सांप्रदायिक चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई करने से बच...

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श्रद्धांजलि: दूधनाथ सिंह, निश्छिल, भोले, पारदर्शी, शैतान और जि़द के साथ जीते हुए लगते थे

रामप्रकाश त्रिपाठी दूधनाथ सिंह ऐसे विलक्षण कथाकार थे जिन्होंने कहानी-उपन्यास लेखन की क्षमता के साथ ही कविता, नाटक और आलोचना के क्षेत्र में काम किया। कहानी की साठोत्तरी पीढ़ी के प्रमुख क थाकारों में शुमार...

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जयपुर साहित्योत्सव में मीरा नायर, जावेद अख्तर, विशाल भारद्वाज शामिल होंगे

जयपुर, 20 दिसंबर (आईएएनएस)। मीरा नायर, जावेद अख्तर और विशाल भारद्वाज जैसी फिल्मी हस्तियां 11वें जी जयपुर साहित्योत्सव में शामिल होंगे। इस समारोह का आयोजन अगले साल 25 से 29 जनवरी तक जयपुर में होगी।...

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पूनम की रात को भी चाँद गायब हो गया

अरुण कान्त शुक्ला अमावस की रात को चाँद का गायब होनाकोई नई बात नहींजहरीली हवाओं की धुंध इतनी छाईपूनम की रात को भी चाँद गायब हो गया|दिल में सभी के मोहब्बत रहती हैकोई नई बात...

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नाव में पतवार नहीं

अरुण कान्त शुक्ला हुजूर, आप जहां रहते हैं,दिल कहते हैं,उसे ठिकाना नहीं,शीशे का घर हैसंभलकर रहियेगा, हुजूरटूटेगा तो जुड़ेगा नहीं,यादों की दीवारे हैंइश्क का जोड़बेवफाई इसे सहन नहीं,ओ, साजिशें रचने वालोघर तुम्हारा हैक्या इसका एतबार...

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पीढ़ियाँ पर बढेंगी इसी राह पर आगे

अरुण कान्त शुक्ला कोट के क़ाज में फूल लगाने सेकोट सजता हैफूल तो शाख पर ही सजता है,क्यों बो रहे हो राह में कांटेतुम्हें नहीं चलनापीढ़ियाँ पर बढेंगी, इसी राह पर आगे,तुम ख़ूबसूरत हो, मुझे...

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तैरना आना पहली शर्त है

अरुण कान्त शुक्ला नाव भी मैं, खिवैय्या भी मैंलहरों से सीखा है मैंनेतूफां-ओ-आंधी का पता लगाना,जो बहे लहरों के सहारे, डूबे हैंतैरना आना पहली शर्त हैसमंदर में उतरने की,धारा के साथ तो बहते, शव हैं  ...

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हारी, मैं हारी

नैना शर्मा हारी, मैं हारी,दुनिया से नही, किसी और से नही,ख़ुद से हारी,हारी मैं हारी।हारी ख़ुद की ख़्वाहिशों से,तमन्नाओं से,तमन्नाओं से, महत्त्वकांछाओं से,जिसने वरण कर लिया मेरे,विश्वास का, विश्वास का स्वाभिमान का,हार गईं मैं मुझसे,...

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