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उत्तराखंडा : अब पिथौरागढ़ सीट पर भाजपा और कांग्रेस की निगाहें

Oct
23 2019

देहरादून, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड में पंचायत चुनाव बीत जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस की निगाहें पिथौरागढ़ सीट पर है। यहां पर त्रिवेन्द्र सरकार में वित्त मंत्री रहे प्रकाश पंत के दिवंगत होने पर चुनाव होना है।

पिथौरागढ़ विधानसभा सीट कुमाऊं मंडल की सबसे महत्वपूर्ण सीट मानी जाती है। 2017 में यह भाजपा के खाते में गई थी। होने वाले उपचुनाव में क्या भाजपा इस सीट को बरकरार रख पाएगी। वहीं कांग्रेस पार्टी यह सीट जीतकर अपनी खोयी साख को क्या वापस कर पाएगी? यह अहम सवाल है। हलांकि इस सीट पर दोनों दलों के लोग अपनी निगाहें लगाए हुए हैं।

देहरादून के वरिष्ठ राजनीतिक विष्लेषक विपिन बनियाल ने बताया कि अभी तक जो भी उपचुनाव हुए हैं। उनमें सत्ताधारी पार्टी ही जीत दर्ज करती रही है। इसके बाद दिवंगत सीटों पर हुए चुनावों पर सहानुभूति का असर पड़ता है। दरअसल, कांग्रेस का यहां पर धड़ों में बंटना भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होगा। उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर थराली से विधायक रहे मगनलाल शाह के निधन के बाद इस सीट पर 2018 में ही उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार और मगनलाल शाह की पत्नी मुन्नी देवी ने जीत दर्ज की थी।

हलांकि पार्टी के कुछ लोग चाह रहे हैं कि दिवंगत पंत के परिवार से किसी को टिकट दिया जाए। जबकि कुछ लोग वहां से नई लीडरशिप तैयार करने के पक्ष में नए चेहरे की तलाश में हैं।

पार्टी के एक नेता ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर कहा कि भाजपा परिवारवाद के खिलाफ आवाज बुलंद करती रही है। ऐसे में परिवारिक लोगों को टिकट देना ठीक नहीं होगा। हलांकि इस बात का अंतिम निर्णय पार्टी हाईकामान को करना है।

पिथौरागढ़ सीट पर कांग्रेस का जलावा रह चुका है। ऐसे में विपक्षी को कमजोर समझना ठीक नहीं है।

ऐसे में दोनों पार्टियों को अब उम्मीदवार तय करने हैं। भाजपा में जहां दिवंगत प्रकाश पंत के परिवार से किसी सदस्य को टिकट दिए जाने की चर्चा है, वहीं कुछ स्थानी नेता भी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। कांग्रेस से 2017 में चुनाव लड़ चुके मयूख महर के चुनाव लड़ने की सुबुगुहाट तेज है। मयूर चुनाव लड़ने से इंकार कर रहे हैं, हालांकि एक धड़ा यहां से हरीश रावत को मैदान में उतारने की बात कर रहा है।

उत्तराखंड भाजपा के मीडिया इंचार्ज देवेन्द्र भसीन का कहना है कि अभी तक पार्टी पंचायत चुनाव में व्यस्त थी, लेकिन अब उपचुनाव की ओर ध्यान आकृष्ट करेगी। जहां तक रही टिकट की बात तो पंत जी के परिवार से ही मिलना चाहिए। क्योंकि अभी आगे ऐसे एक उपचुनाव में हो चुका है। हलांकि अंतिम निर्णय पार्टी के बड़े नेताओं को लेना है।

उधर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है, पार्टी जोर-शोर से इस सीट को जीतने की तैयारी कर रही है। हम लोग मयूख महर को अपना प्रत्याशी बनाने का आग्रह करेंगे।

पिथौरागढ़ उपचुनाव त्रिवेन्द्र रावत सरकार की दूसरी परीक्षा है। कहा जाता है कि उपचुनाव सत्ताधारी दल के पक्ष में जाता है, लेकिन कई बार बाजी पलट भी जाती है। ऐसे में सरकार के आधे कार्यकाल के बाद हो रहा उपचुनाव काफी अहम होगा। फिलहाल पिथौरागढ़ में भाजपा और कांग्रेस दोनों की निगाहे हैं।

वर्ष 2017 में पिथौरागढ़ सीट से भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश पंत विधायक चुने गए थे। वह त्रिवेंद्र रावत सरकार में वित्त मंत्री भी रहे। इसी साल 5 जून को बीमारी के कारण उनका निधन हो गया। उनके स्थान पर रिक्त सीट पर 6 महीने के भीतर चुनाव होना चाहिए। इसलिए पंचायत चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद भाजपा और कांग्रेस का फोकस पिथौरागढ़ में होगा।

--आईएएनएस

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