Kharinews

कांडा की कहानी : जमींदारी से जेल तक गजब का गुणा-गणित है गोपाल का..

Oct
25 2019

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर। हरियाणा की राजनीति का डूबता-चमकता, चमकता-डूबता सितारा, वह सितारा जिसने सत्ता का सुख अगर भोगा, तो तिहाड़ जेल की सलाखों की तन्हाई भी झेली। सितारे गर्दिश में पहुंचे तो 54 साल के गोपाल गोयल कांडा अपनी इमारतों की चार-दिवारी में बंद हो गए। अब जब सुनहरा मौका हाथ लगते देखा तो चार-दिवारी से बाहर आकर चुनावी मैदान में उतर ताल ठोंक दी। ताल ठोंकी तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि गोपाल के वक्त का गुणा-गणित आखिर परिणाम क्या निकाल कर देगा?

अतीत पर नजर डालें तो एअर हॉस्टेस गीतिका शर्मा आत्महत्या कांड में कल तक दिल्ली पुलिस जिन गोपाल गोयल कांडा की तलाश में खाक छाना करती थी, अब वही गोपाल गोयल कांडा हरियाणा की राजनीति में लीक से हटकर कुछ कर दिखाने की भागदौड़ में लगे हैं।

हरियाणा के सिरसा जिले के बिलासपुर गांव के मूल निवासी गोपाल गोयल कांडा ने नौजवानी के दिनों में पुश्तैनी धंधा संभाला था। सिरसा की सब्जी मंडी में नाप तौल करने का। सब्जियों की नाप-तौल करते-करते गोपाल गोयल कांडा ने नेताओं की नब्ज पकड़ने का भी हुनर हथिया लिया। बस फिर क्या था, इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सब्जी मंडी में माप-तौल का कांटा संभालने वाले गोपाल गोयल कालांतर में अपने नाम और जाति के बाद कांडा भी जोड़ने लगे। जबकि गोपाल गोयल के पिता मुरलीधर गोयल की गिनती सिरसा और उसके आसपास के इलाके में नामी वकीलों में हुआ करती थी।

देखते-देखते गोपाल गोयल कांडा हरियाणा के गृह राज्य मंत्री भी बन गए। सब्जी मंडी से निकल कर हरियाणा की राजनीति में कदम रखा। सत्ता का सुख मिला तो गोपाल गोयल कांडा को दो आंखों से जमाने में चार-चार दुनिया नजर आने लगीं।

कहा तो यह भी जाता था कि मेहनतकश गोपाल गोयल कांडा ने संघर्ष के दिनों में जूते बनाने का भी कारोबार किया। यह अलग बात है कि वो कारोबार नहीं चला। जूतों की बड़ी दुकान यानि शो-रुम खोला तो वहां भी किस्मत दगा दे गई। एक जमाने में चर्चाएं तो यह भी हुआ करती थीं कि हमेशा खुद के बलबूते कुछ कर गुजरने की ललक रखने वाले गोपाल गोयल कांडा ने जूते बनाने-बेचने के बाद टीवी रिपेयरिंग का भी काम कुछ वक्त तलक किया।

किस्मत ने पलटा अचानक तब मारा जब 1990 के दशक के अंत में गोपाल का प्रापर्टी के कारोबार में गणित सही बैठ गया। रियल स्टेट कारोबार के लिए गोपाल ने चुना हरियाणा का मंहगा शहर दिल्ली से सटा गुरुग्राम (तब गुड़गांव)। प्रॉपर्टी के कारोबार ने राजनीति में घुसने का रास्ता दिखा दिया। जब कदम राजनीति और रियल स्टेट के कारोबार में घुसे तो गोपाल पर अपराधियों के साथ सांठगांठ के भी आरोप लगे। हांलांकि गोपाल गोयल कांडा ने किसी भी अवांछनीय तत्व से अपने संबंधों को खुलकर कभी नहीं स्वीकारा। इतना ही नहीं 2000 के दशक में केंद्र सरकार की नजर में जब कांडा के कारनामे खटके तो उनके खिलाफ तमाम खुफिया जांच भी कराई गईं।

उन तमाम जांच की रिपोर्ट क्या रही? 10-15 साल बाद भी किसी को नहीं पता। हां यह जरुर है कि 2000 के ही दशक में (सन 2008) में गोपाल गोयल कांडा के अड्डों पर आयकर विभाग ने ताबड़तोड़ छापे जरुर मारे थे।

आयकर विभाग के उन छापों में क्या कुछ हाथ लगा या नहीं लगा? आयकर विभाग के अलावा आज तक किसी को जमाने में भनक तक नहीं है।

दौलत-शोहरत ने जब संग दिया तो गोपाल गोयल ने एक निजी एअरलाइंस कंपनी खोल ली। यह अलग बात है कि 2009 आते-आते एअरलाइंस कंपनी बंद हो गई। इसके बाद भी एअरलाइंस कंपनी से निकले मुसीबतों के जिन्नों ने गोपाल की जिंदगी का गणित गड़बड़ाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। एअरलाइंस कंपनी में काम करने वाली एयर हॉस्टेस गीतिका शर्मा ने संदिग्ध हालातों में दिल्ली में आत्महत्या कर ली। मामला लिखा गया गोपाल गोयल कांडा के खिलाफ।

गीतिका शर्मा आत्महत्या कांड में कांडा को सत्ता सुख से विमुख होकर तिहाड़ जेल की तन्हा कोठरियों में कैद होना पड़ा। इसी के चलते सन 2012 में कांडा को राजनीतिक कुर्सी भी गंवानी पड़ी। 2012 में जेल पहुंचे कांडा सन 2014 में तिहाड़ से निकल कर बाहर आ पाए। उसके बाद सन 2014 में कांडा ने लोकसभा चुनाव लड़ा। उस चुनाव में हारना तय था सो हार गए।

कुल जमा आज के बदले हालातों में अगर यह कहा जाए कि गोपाल गोयल कांडा की जमींदारी से लेकर जेल तक की कहानी भी अपने आप में कम हैरतंगेज नहीं है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

--आईएएनएस

Related Articles

Comments

 

फीफा विश्व कप क्वालीफायर : ओमान ने भारत को 1-0 से हराया

Read Full Article
0

Subscribe To Our Mailing List

Your e-mail will be secure with us.
We will not share your information with anyone !

Archive