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अपराध नियंत्रण में उप्र अन्य राज्यों से बेहत : मंत्री

Oct
23 2019

लखनऊ, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह ने बुधवार को यहां कहा कि एनसीआरबी के 2017 के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश की स्थिति अपराध नियंत्रण में अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में काफी बेहतर है।

महेंद्र सिंह ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, अपराध दर प्रदेश की प्रति लाख जनसंख्या के आधार पर निकाली जाती है। जिस प्रदेश में जनसंख्या अधिक होगी, वहां अपराध की संख्या भी अधिक होगी। जाहिर है कि क्राइम रेट ही अपराधों की सही स्थिति समझने के लिए वास्तविक संकेतक है। लेकिन उप्र की स्थिति अपराध नियंत्रण में अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की तुलना में काफी अच्छी है।

उन्होंने कहा, आंकड़ों पर गौर करें तो लूट के मामलों में उत्तर प्रदेश 16वें स्थान पर (क्राइम रेट 1.8), हत्या के मामलों में 22वें स्थान पर (क्राइम रेट 1.9), नकबजनी के मामलों में 31वें स्थान पर (क्राइम रेट 4.2), दुष्कर्म के मामलों में 22वें स्थान पर (क्राइम रेट 4.0) हैं। ऐसे में कुल आपराधिक मामलों में उत्तर प्रदेश का 24वां स्थान है। यह रैंकिंग बाकी प्रदेशों की तुलना में काफी बेहतर है।

उन्होंने कहा, एनसीआरबी द्वारा प्रकाशित क्राइम इन इंडिया-2017 के अनुसार देश में कुल 30,62,579 आई.पी.सी. के अपराध पंजीकृत हुए, जिनमें से 3,10,084 आई.पी.सी. के अपराध उत्तर प्रदेश में घटित हुए, जो कि देश में ऐसे पंजीकृत अपराधों का 10.1 प्रतिशत है। जबकि जनसंख्या के आधार पर उत्तर प्रदेश की आबादी देश की आबादी का 17.65 प्रतिशत है। उक्त रिपोर्ट के आधार पर कुल अपराधों की ²ष्टि से उत्तर प्रदेश में विभिन्न शीर्षक के अन्तर्गत अपराधों का अधिक होना या बढ़ा हुआ बताया जा रहा है, जो गलत है।

महेंद्र सिंह ने कहा, अपराध की स्थिति को समझने के लिए क्राइम रेट एक बेहतर एवं विश्वसनीय संकेतक है। एनसीआरबी के मुताबिक संबंधित वर्ग की प्रति एक लाख जनसंख्या के सापेक्ष अपराधों की संख्या को अपराध दर (क्राइम रेट) के रूप में परिभाषित किया गया है। यह एक स्थापित वास्तविक संकेतक है, जो राज्य के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के प्रभाव को संतुलित करता है।

उन्होंने कहा, राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो, नई दिल्ली के अध्याविधिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में विभिन्न अपराध शीर्षकों में देश के राज्यों के सापेक्ष उत्तर प्रदेश की वर्तमान स्थिति, डकैती में 26वां, लूट में 16वां, हत्या में 22वां, नकबजनी में 31वां, दुष्कर्म में 22वां तथा महिला संबधित अपराध में 16वां स्थान, यानी कुल 24वां स्थान है।

मंत्री ने कहा, राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो, नई दिल्ली के अध्याविधिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में प्रदेश पुलिस द्वारा अपराधियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई में देश के अन्य राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों के सापेक्ष उत्तर प्रदेश की वर्तमान स्थिति भादवि के अपराधों में गिरफ्तारी में तीसरा, गिरफ्तार अभियुक्तों में से दोषसिद्ध में तीसरा, महिला संबंधित अपराधों में दोषसिद्ध में पहला, साइबर अपराधों में दोषसिद्ध में पहला, शस्त्रों के जब्तीकरण में पहला, जाली मुद्रा के जब्तीकरण में अपराध पंजीयन में पहला तथा सम्पत्ति की बरामदगी में 5वां स्थान है।

उन्होंने बताया, अपराधों के सम्पूर्ण आंकड़ों के साथ में यह भी देखना आवश्यक है कि हिंसात्मक अपराधों की स्थिति क्या है। वर्ष 2016 में राज्य में 65,090 हिंसात्मक अपराधों की तुलना में वर्ष 2017 में 64,450 दर्ज हुए हैं, जो कमी दर्शाता है। जबकि वर्ष 2015 के सापेक्ष वर्ष 2016 में हिंसात्मक अपराधों में 27 प्रतिशत से भी अधिक वृद्धि हुई थी। अपराधों के अलग-अलग मदों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि वर्ष 2017 में वर्ष 2016 के सापेक्ष हत्या में 11.5 प्रतिशत, डकैती में 7.4 प्रतिशत, लूट में 9 प्रतिशत, उगाही में 54 प्रतिशत, फिरौती हेतु अपरहण में 29.2 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी हुई है।

सिंह ने आगे कहा, वर्तमान सरकार के कार्यकाल में जनहित में शत-प्रतिशत मामले दर्ज किए जाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, फिर भी गंभीर अपराधों में उपरोक्तानुसार गिरावट आई है तथा पुलिस की कार्रवाई में भी तेजी आई है।

उन्होंने कहा, 2016 की तुलना में 2017 में अपराध काफी कम हुए हैं। 2016 में 4889 हत्याएं हुई थीं, जबकि 2017 में 4324 हत्याए हुईं। इसी तरह 2016 में जहां 284 डकैती के मामले सामने आए, वहीं 2017 में 263 डकैती हुई। 2016 में 4502 लूट के मामले दर्ज हुए, जो 2017 में घटकर 4089 रह गए। इसी तरह 2016 में धमकी और ब्लैकमेलिंग के 1893 मामले दर्ज हुए, जबकि 2017 में इस तरह के मामले घटकर 855 रह गए। 2016 में अपहरण और फिरौती की 65 घटनाएं हुईं, जबकि 2017 में ये घटकर 46 रह गई हैं।

अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा, बुलंदशहर के मंदिर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश को सोशल मीडिया व अन्य प्लेटफार्म पर तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर की प्रशासनिक कमेटी को लेकर सवाल किए हैं। सोशल मीडिया पर किसी भी तरह से भड़काऊ बयानबाजी पर सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।

-- आईएएनएस

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