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निकम्मी व्यवस्था पर शिवराज की लगाम ढीली : राजगोपाल

May
15 2018

संदीप पौराणिक
ओरछा (टीकमगढ़), 15 मई (आईएएनएस)। एकता परिषद के संस्थापक पी.वी. राजगोपाल का मानना है कि मध्यप्रदेश में निकम्मी व्यवस्था (नौकरशाही) पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लगाम ढीली हो गई है, जिस वजह से सरकार के फैसलों का लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है।

जन-आंदोलन, 2018 के सिलसिले में ओरछा में आयोजित सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे राजगोपाल ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज निकम्मी व्यवस्था से गांव के लोगों को न्याय दिलाने की कोशिश करते रहे हैं, जो संभव नहीं हो सका है। इन लोगों के हाथ में जमीन और पानी की समस्या के हल के साथ राशन बांटने, दूसरी सुविधाएं दिलाने की जिम्मेदारी है, यह नौकरशाही पूरी तरह आलसी है, परिणामस्वरूप गांव के लोग अपना हक पाने से वंचित हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि नौकरशाह जब सेवा में रहते हैं, तब एक तरफ अपने बच्चों को स्थापित करने की जुगत में लगे रहते हैं और सेवानिवृत्त होने के बाद अपना इंतजाम करना उनका पहला लक्ष्य होता है। यही कारण है कि वह जनता की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते।

उन्होंने आगे कहा कि जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने बुंदेलखंड को लेकर जो रिपोर्ट जारी की है, उस पर सरकार और नौकरशाहों को ध्यान देना चाहिए था। यह सही है कि इस इलाके का हाल बहुत बुरा है, एक भी जल संरचना ऐसी नहीं है, जिसे दिखाया जा सके। नौकरशाह और सरकार वास्तविकता को स्वीकार करने की बजाय उस पर पर्दा डालने में लग गई, इसका उदाहरण देखिए कि बुंदेलखंड के अध्ययन से सामने आए तथ्यों को छुपाने के लिए दो पेज का ऐसा ब्यौरा जारी किया गया, जो हकीकत से मेल नहीं खाता।

बुंदेलखंड के हालात से जुड़े सवाल पर राजगोपाल ने कहा कि यह क्षेत्र देश के उन हिस्सों में से एक है, जो सबसे ज्यादा समस्याग्रस्त है, सूखे की चपेट में है, लोग पलायन कर रहे हैं, दाने-दाने को मोहताज हैं। यहां के लिए एक कार्ययोजना तैयार की गई है, इसके तहत विभिन्न दल जमीनी स्तर पर जाकर देखेंगे कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए तय किए गए निर्देशों का कितना पालन हो रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए 'ड्राउट मैनुअल' है। इसके तहत जानवरों को चारा उपलब्ध कराना, रोजगार मुहैया कराना, मध्यान्ह भोजन योजना को जारी रखना और खाद्य सुरक्षा तय करना सरकार की जवाबदेही होती है।

राजगोपाल ने मुख्यमंत्री शिवराज को सलाह दी कि वह जमीनी हकीकत जानने के लिए पदयात्रा करें और इसमें राजेंद्र सिंह व उन्हें (राजगोपाल) साथ लेकर चलें। इस यात्रा के दौरान वे गरीबों के घर जाएं और वास्तविकता को जानने की कोशिश करें, तभी इस इलाके के दर्द को वे जान पाएंगे।

शिवराज बीते 15 साल से राज्य के मुख्यमंत्री हैं और उनके रहते प्रदेश के हालात क्यों नहीं सुधरे? इस सवाल पर राजगोपाल ने कहा कि शिवराज ग्रामीण परिवेश और साधारण परिवार से आते हैं, लेकिन उनका नौकरशाही पर नियंत्रण नहीं है। उन्हें 10 साल बाद ही पद छोड़ देना चाहिए था। अगर ऐसा करते तो आज वे न केवल लोकप्रिय होते, बल्कि आने वाले समय में भी उन्हें लोग याद करते।

सामाजिक संगठनों द्वारा देश की समस्याएं दूर करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए राजगोपाल ने कहा कि राजस्थान के भीकमपुरा में चिंतन शिविर आयोजित किया गया था। इस शिविर में राष्ट्रीय हालात पर चर्चा हुई थी, अब राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर बैठकों का दौर शुरू हुआ है।

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संदीप पौराणिक

लेखक देश की प्रमुख न्यूज़ एजेंसी IANS के मध्यप्रदेश के ब्यूरो चीफ हैं.

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