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आओ, समझने की कोशिश करें बलात्कार अचानक इस देश में क्यो बढ़ गए ???

Jul
04 2018

स्नेहा चौहान

लोग कहते हैं कि रेप क्यों होता है ?

एक 8 साल का लड़का सिनेमाघर मे राजा हरिशचन्द्र फिल्म देखने गया और फिल्म से प्रेरित होकर उसने सत्य का मार्ग चुना और वो बडा होकर महान व्यक्तित्व से जाना गया।

परन्तु आज 8 साल का लडका टीवी पर क्या देखता है ?

सिर्फ नंगापन और अश्लील वीडियो और फोटो, मैग्जीन में अर्धनग्न फोटो, पडोस मे रहने वाली भाभी के छोटे कपड़े , स्कूल कॉलेज के बाहर लड़को का हुजूम, मोबाइल में दिन भर पोर्न फिर चाहे घर हो आफिस हो या सड़क का कोई कोना,या फिर सुनसान पार्क ।

इन सबको ये सब दे कौन रहा है, इनके पास इतना वक़्त कैसे है कि ये इस चीज़ का आनंद लेके अपना यौवन ओर बचपन बर्बाद कर रहे है? ये मानसिकता आई कहा से ? उसके जिम्मेदार कहीं न कहीं हम खुद जिम्मेदार है। क्योंकि हम joint family नही रहते। हम अकेले रहना पसंद करते हैं। और अपना परिवार चलाने के लिये माता पिता को बच्चों को अकेला छोड़कर काम पर जाना है और बच्चे अपना अकेलापन दूर करने के लिये टीवी और इन्टरनेट का सहारा लेते हैं।और उनको देखने के लिए क्या मिलता है सिर्फ वही अश्लील वीडियो और फोटो तो वो क्या सीखेंगे यही सब कुछ ना ?

अगर वही बच्चा अकेला न रहकर अपने दादा दादी के साथ रहे तो कुछ अच्छे संस्कार सीखेगा। कद्र करेगा आपकी आपके बुढ़ापे पे।

पूरा देश रेप पर उबल रहा है, कईयों को अब भी फर्क नही पड़ा है, छोटी छोटी बच्चियो से जो दरिंदगी हो रही उस पर सबके मन मे गुस्सा है। कोई सरकार को कोस रहा, कोई किसी को, कोई समाज को तो कई feminist सारे लड़को को बलात्कारी घोषित कर चुकी है ! एक झटके में पूरी मर्दो की जमात बलात्कारी है।

बलात्कारी कोख से नही होता इंसान, उसके हालात उसको बना देते है। ये समाज और बाजार है जिसके कारण एक आदमी की ज़िंदगी उसकी नही रही ,लेकिन आप सुबह से रात तक कई बार sunny leon के कंडोम के add देखते है फिर दूसरे add में  रणवीर सिंह शैम्पू के ऐड में लड़की पटाने के तरीके बताता है लेकिन तब आपको गुस्सा नही आता है, है ना ? क्यों आएगा सारे उत्पादों को उपभोग भी तो आप ही करते है।

मम्मी बच्चों के साथ Star Plus, जी TV, सोनी TV देखती है जिसमें एक्टर और एक्ट्रेस सुहाग रात मनाते है। किस करते है। आँखो में आँखे डालते है। और तो और भाभीजी घर पर है, जीजाजी छत पर है, टप्पू के पापा और बबिता जिसमे एक व्यक्ति दूसरे की पत्नी के पीछे घूमता लार टपकता नज़र आएगा, पूरे परिवार के साथ देखते है।

इन सब serial को देखकर आपको गुस्सा नही आता ??

आप थोड़ा ध्यान दीजिए आपके बच्चे अपनी उम्र से कई पहले बड़े हो गए है, जिस उम्र में उनको सिर्फ खेलना पढ़ना चाहिए ,वो घर की पंचायत को सुनके ,उसकी राजनीति सिख रहे है। आपको लगता है मेरा बच्चा कितना समझदार हो गया है ,असल मे उस समझदारी के पीछे आप ने एक इंसान की ज़िंदगी के वो पल छीन के उसको मौत के करीब ल दिया है।

बच्चो को कार्टून नेटवर्क के नाम पे जो tv या मोबाइल आप पकड़ा रहे हो उससे उसका नुकसान ही है। बच्चे की 5 साल की उम्र तक उसको जो सीखा दिया वो ज़िंदगी मे नही भूलता, कार्टून की कहानियां और ज्ञान क्या मिल रहा है देखिएगा। जिस बच्चे को कार्टून दिखा के आप बड़ा कर रहे हो,उसकी जिंदगी आगे जाके कार्टून ही हो जाएगी। ना वो आपका सगा होगा ना किसी और का।

खुलेआम TV- फिल्म वाले आपके बच्चों को बलात्कारी बनाते है। उनके मन मे जहर घोलते है। तब आपको गुस्सा नही आता ? क्योकि आपको लगता है कि
रेप रोकना सरकार की जिम्मेदारी है । पुलिस, प्रशासन, न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी है..

लेकिन क्या समाज और मीडिया की कोई जिम्मेदारी नही। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में कुछ भी परोस दोगे क्या ? अब तो सरकार ने खुद के फायदे के लिए , नेटवर्क फ्री में उपलब्ध करा दिया है। रोक लो किसको रोकोगे। आप खुद को नही रोक पा रहे उस फ्री के नेटवर्क का गुलाम होने से ,बच्चो या किसी ओर को क्या बोलोगे?

TV चैनल्स, वालीवुड, मीडिया को कुछ नही कहेंगे। क्योकि वो आपके मनोरंजन के लिए है। सच पुछिऐ तो TV Channels अश्लीलता परोस रहे है ...पाखंड परोस रहे है, झूंठे विज्ञापन परोस रहे है , झूंठेऔर सत्य से परे ज्योतिषी पाखंड से भरी कहानियां एवं मंत्र, ताबीज आदि परोस रहै है। उनकी भी गलती नही है। क्योंकि आप खरीददार हो .....?? निर्मल बाबा, राधा माँ तांत्रिक बाबा, स्त्री वशीकरण के जाल में खुद फंसते हो ।

अभी टीवी का खबरिया चैनल मंदसौर के गैंगरेप की घटना पर समाचार चला रहा है। जैसे ही ब्रेक आती है पहला विज्ञापन बोडी स्प्रे का जिसमे लड़की आसमान से गिरती है, दूसरा कंडोम का और चौथा प्रेगनेंसी चेक करने वाले मशीन का।

जब हर विज्ञापन, हर फिल्म में नारी को केवल भोग की वस्तु समझा जाएगा तो बलात्कार के ऐसे मामलों को बढ़ावा मिलना निश्चित है। क्योंकि "हादसा एक दम नहीं होता, वक़्त लगता है  उसको परवरिश और पनपने  में बरसो। ऐसी निंदनीय घटनाओं के पीछे निश्चित तौर पर भी बाजारवाद ही ज़िम्मेदार है ।

ध्यान रहे समाज और मीडिया को बदले बिना ये आपके कठोर सख्त कानून कितने ही बना लीजिए, ये घटनाएं नही रुकने वाली है।

इंतज़ार कीजिये बहुत जल्द आपको फिर केंडल मार्च निकालने का अवसर हमारा स्वछंद समाज, बाजारू मीडिया और गंदगी से भरा सोशल मीडिया देने वाला है ।

अगर अब भी आप बदलने की शुरुआत नही करते हैं तो समझिए कि फिर कोई भारत की बेटी निर्भया एवम् अन्य बेटियों की तरह बर्बाद होने वाली है।

आपको आपकी बेटियो, बेटों सब को  बचाना है तो सरकार, कानून, पुलिस के भरोसे से बाहर निकलकर समाज, मीडिया और सोशल मीडिया की गंदगी साफ करने की आवश्यकता है। साफ नही करते बने तो असल मा बाप बनके इनको अपने मासूम बच्चो से दूर रखिये।

ये भी न करते बने तो कम से कम उनको सेक्स का ज्ञान दीजिये, ये भी न बने तो अबोध मन को प्यार से सीचके ,उनके साथ वक़्त बिताइए।

कल दिन में बलात्कारियों की सज़ा का सुझाव आया लिख दिया था, शाम तक बलात्कारियों की उम्र बदल गयी, वो सज़ा इन मासूम बच्चो के लिए नही है। अब आगे क्या? इस सवाल ने बैचैन किया।

दोस्तो खराबी बीज में है , जड़ ही ज़हरीली हो तो पौधे से फूल की उम्मीद बेईमानी है।

जरूरत है सही बीज की, उसके पोषण की उसको देखभाल की , उसको प्यार देने की वक़्त देने की। आज यही नही है किसीं के पास सिवाए दिखावे और मतलब के खुरगर्ज होना सही है लेकिन इतना भी नही।

सिर्फ औरत ही नही मर्द भी जिम्मेदार है, बराबर की  इन घटनाओं के पीछे, ज़िंदगी बर्बाद दोनों की होती है। ना कि किसीं एक की।

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स्नेहा चौहान

स्नेहा चौहान सामाजिक सरोकारों को लेकर सक्रिय स्वतंत्र पत्रकार हैं.

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