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सीसीआई ने जेटीईकेटी कॉर्प, उसकी भारतीय शाखा पर 17 करोड़ रुपये जुर्माना लगाए

Aug
14 2019

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने बुधवार को जापान की जेटीईकेटी कार्पोरेशन और उसकी भारतीय सहयोगी कंपनी जेटीईकेटी सोना ऑटोमोटिव इंडिया लि. (जेएसएआई) पर एनएसके लि. जापान के साथ मिलकर वाहन निर्माताओं को इलेक्ट्रिक पॉवर स्टेरियरिंग (ईपीएस) सिस्टम की बिक्री में गुटबंदी को लेकर 17 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

आयोग ने कहा कि चूंकि एनएसके/आरएनएसएस ने ही सबसे पहले 'कम पेनाल्टी वाले आवेदक' के रूप में आयोग के यहां आवेदन किया था और इसके साथ ही 'पूर्ण एवं सही जानकारियां' दी थीं, इसलिए एनएसके/आरएनएसएस और उनकी सहयोगी कंपनियों के लिए पेनाल्टी में शत-प्रतिशत कटौती करने की मंजूरी दी गई।

सीसीआई ने एक बयान में कहा, "यही नहीं, चूंकि जेटीईकेटी/जेएसएआई ने 'कम पेनाल्टी वाली आवेदक' के रूप में आयोग के यहां बाद में आवेदन किया था और इसने संबंधित मामले में महत्वपूर्ण जानकारियां दी थीं, इसलिए जेटीईकेटी/जेएसएआई और उसकी सहयोगी कंपनियों के लिए पेनाल्टी में 50 फीसदी की कटौती को मंजूरी दी गई। अत: जेटीईकेटी/जेएसएआई को 17,07,31,443 रुपये का कुल जुर्माना देना है।"

सीसीआई ने अपनी जांच में पाया कि यह गुटबंदी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से मूल्य तय करने, बाजारों को आवंटित करने, बोली संबंधी कार्यों में घालमेल और इन तीन ऑटोमोबाइल ओईएम द्वारा जारी सूचना अनुरोध/कोटेशन अनुरोध (आरएफआई/आरएफक्यू) से जुड़ी बोली प्रक्रिया में हेर-फेर के जरिए की गई है। यह गुटबंदी वर्ष 2005 से लेकर 25 जुलाई, 2011 तक की गई थी।

आधिकारिक बयान में कहा गया है, "इस मामले में एकत्रित साक्ष्यों से यह पता चला कि कीमतों को लेकर वाणिज्यिक ²ष्टि से संवेदनशील मानी जाने वाली सूचनाओं इत्यादि पर विचार-विमर्श किया गया था। संबंधित पक्षों के इस तरह के आचरण से भारत में प्रतिस्पर्धा पर व्यापक प्रतिकूल असर होने के बारे में पता चला।"

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